भाषा संबंधी प्रावधान - language provisions
भाषा संबंधी प्रावधान - language provisions
अनुच्छेद 29 (1) में कहा गया है, " भारत के राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के निवासी नागरिकों के किसी अनुभाग को, जिसकी अपनी विशेष भाषा, लिपि या संस्कृति है, उसे बनाए रखने का अधिकार है।" संविधान के अनुच्छेद 350 ब के तहत भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों से संबंधित सभी मामलों की जांच के लिए भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए विशेष अधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रावधान करता है।
भारतीय संविधान के भाग 17 में धारा 343-351 तक भारतीय भाषाओं संबंधी प्रावधान किया गया है। अनुच्छेद 343 के खंड में कहा गया है कि संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतरराष्ट्रीय रूप होगा।
अनुच्छेद 344 में खंड (1) में कहा गया है कि राष्ट्रपति, इस संविधान के प्रारंभ से पांच वर्ष की समाप्ति पर और तत्पश्चात् ऐसे प्रारंभ से दस वर्ष की समाप्ति पर आदेश द्वारा एक आयोग गठित करेगा जो एक अध्यक्ष और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्टविभिन्न भाषाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले ऐसे अन्य सदस्यों से मिलकर बनेगा जिनकोराष्ट्रपति नियुक्त करे और आदेश में आयोग द्वारा अनुसरण की जाने वाली प्रक्रिया परिनिश्चितकी जाएगी।
अनुच्छेद 345 में राज्य की राजभाषा या राजभाषाएं के संबंध में उल्लेख किया गया है। इसमें अनुच्छेद 346 और अनुच्छेद 347 के उपबंधों के अधीन रहते हुए, किसी राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा उस राज्य में प्रयोग होने वालीभाषाओं में से किसी एक या अधिक भाषाओं को या हिंदी को उस राज्य के सभी या किन्हींशासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा या भाषाओं के रूप में अंगीकार करसकेगा।
परंतु जब तक राज्य का विधान-मंडल, विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे तब तक राज्य केभीतर उन शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग किया जाता रहेगा जिनके लिए उसका इस संविधान के प्रारंभ से ठीक पहले प्रयोग किया जा रहा था।
अनुच्छेद 346 में एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच या किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि कीराजभाषा के संबंध में कहा गया है कि संघ में शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग किए जाने के लिए तत्समय प्राधिकृतभाषा, एक राज्य और दूसरे राज्य के बीच तथा किसी राज्य और संघ के बीच पत्रादि कीराजभाषा होगी। परंतु यदि दो या अधिक राज्य यह करार करते हैं कि उन राज्यों के बीच पत्रादि कीराजभाषा हिंदी भाषा होगी तो ऐसे पत्रादि के लिए उस भाषा का प्रयोग किया जा सकेगा।
अनुच्छेद 347 में किसी राज्य की जनसंख्या के किसी अनुभाग द्वारा बोली जाने वाली भाषा के संबंध में विशेष उपबंध बनाया गया है। इसमें कहा गया है कि यदि इस निमित्त मांग किए जाने पर राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है
कि किसी राज्य की जनसंख्या का पर्याप्त भाग यह चाहता है कि उसके द्वारा बोली जानेवाली भाषा को राज्य द्वारा मान्यता दी जाए तो वह निर्देश दे सकेगा कि ऐसी भाषा को भीउस राज्य में सर्वत्र या उसके किसी भाग में ऐसे प्रयोजन के लिए, जो वह विनिर्दिष्ट करे. शासकीय मान्यता दी जाए।
अनुच्छेद 349भाषा से संबंधित कुछ विधियां अधिनियमित करने के लिए विशेष प्रक्रिया के संबंध में कहा गया कि इस संविधानके प्रारंभ से पंद्रह वर्ष की अवधि के दौरान, अनुच्छेद 348 के खंड (1) में उल्लिखित किसी प्रयोजन के लिए प्रयोग की जाने वाली भाषा के लिए उपबंध करने वाला कोई विधेयक यासंशोधन संसद् के किसी सदन में राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी के बिना पुनस्र्थापित या प्रस्तावितनहीं किया जाएगा और राष्ट्रपति किसी ऐसे विधेयक को पुनस्थापित या किसी ऐसे संशोधनको प्रस्तावित किए जाने की मंजूरी अनुच्छेद 344 के खंड (1) के अधीन गठित आयोग कीसिफारिशों पर और उस अनुच्छेद के खंड (4) के अधीन गठित समिति के प्रतिवेदन पर विचारकरने के पश्चात् ही देगा, अन्यथा नहीं।
अनुच्छेद 350 में समस्या के निवारण के लिए अभ्यावेदन में प्रयोग की जाने वाली भाषा के संबंध में उल्लेख किया गया है कि प्रत्येक व्यक्तिकिसी व्यथा के निवारण के लिए संघ या राज्य के किसी अधिकारी या प्राधिकारी को यथास्थिति, संघ में या राज्य में प्रयोग होने वाली किसी भाषा में अभ्यावेदन देने का हकदारहोगा।
अनुच्छेद 350-क में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाओं के संबंध में कहा गया है कि प्रत्येक राज्य और राज्य के भीतरप्रत्येक स्थानीय प्राधिकारी भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के बालकों को शिक्षा के प्राथमिक स्तर परमातृभाषा में शिक्षा की पर्याप्त सुविधाओं की व्यवस्था करने का प्रयास करेगा और राष्ट्रपतिकिसी राज्य को ऐसे निर्देश दे सकेगा जो वह ऐसी सुविधाओं का उपबंध सुनिश्चित कराने केलिए आवश्यक या उचित समझता है।
अनुच्छेद 350-ख में भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों के लिए विशेष अधिकारी के संबंध में कहा गया है कि (1) भाषाई अल्पसंख्यक वर्गों केलिए एक विशेष अधिकारी होगा जिसे राष्ट्रपति नियुक्त करेगा। (2) विशेष अधिकारी का यह कर्तव्य होगा कि वह इस संविधान के अधीन भाषाईअल्पसंख्यक वर्गों के लिए उपबंधित रक्षोपायों से संबंधित सभी विषयों का अन्वेषण करे औरउन विषयों के संबंध में ऐसे अंतरालों पर जो राष्ट्रपति निदिष्ट करे, राष्ट्रपति को प्रतिवेदन देऔर राष्ट्रपति ऐसे सभी प्रतिवेदनों को संसद् के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाएगा और संबंधितराज्यों की सरकारों को भिजवाएगा।
अनुच्छेद 351 में हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश देते हुए कहा गया कि संघ का यह कर्तव्य होगा कि वह हिंदी भाषा काप्रसार बढ़ाए, उसका विकास करे जिससे वह भारत की सामासिक संस्कृति के सभी तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके और उसकी प्रकृति में हस्तक्षेप किए बिना हिंदुस्तानी में और आठवीं अनुसूची में विनिर्दिष्ट भारत की अन्य भाषाओं में प्रयुक्त रूप, शैली और पदों को आत्मसात करते हुए और जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहां उसके शब्द-भंडार के लिएमुख्यतः संस्कृत से और गौणतः अन्य भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धिसुनिश्चित करे।
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