अधिगम उपागम , औसतीकरण नियम - learning approach, averaging rule

अधिगम उपागम , औसतीकरण नियम - learning approach, averaging rule



इस उपागम के अंतर्गत प्रेक्षक सूचनाओं को यांत्रिक एवं अत्यंत सरलता के आधार पर संयुक्त करते हैं और इस प्रकार से सूचनाओं के संयुक्तिकरण के बारे में कुछ सोचते विचारते नहीं है। यदि किसी प्रेक्षक को किसी व्यक्ति के संबंध में धनात्मक सूचनाएं प्राप्त होती हैं तो वह उसकी छवि धनात्मक रूप में निर्मित कर लेता है। इसके विपरीत यदि ऋणात्मक सूचना मिले तो ऋणात्मक छवि का निर्माण कर लेता है। इस उपागम के अंतर्गत छवि निर्माण में सूचनाओं के संयुक्तिकरण के लिए नार्मन एंडरसन 1959, 1965, 1968, 1974) ने औसतीकरण नियम विकसित किया।


औसतीकरण नियम


एंडरसन तथा अन्य वैज्ञानिकों ने इन सूचनाओं की व्याख्या करने के लिए मूल्यांकनात्मक विमा पर जोर

दिया है। इन सभी का मानना है कि लक्षित व्यक्ति के संबंध में अनेक प्रकार की सूचनाएं प्राप्त होती हैं। प्रेक्षक. इन सूचनाओं के आधार पर लक्षित व्यक्ति के अनेक शीलगुण की जानकारी प्राप्त कर लेता है।

प्रेक्षक जब उस व्यक्ति से बातचीत करता है तो बहुत ही कम समयांतराल में उस व्यक्ति से संबंधित सूचना-संकेत प्राप्त कर लेता है। साथ ही उस व्यक्ति के बारे में अपनी समझ विकसित कर लेता है कि यह व्यक्ति बुद्धिमान, वाकपटुता तथा धार्मिक भी है तथा साथ ही साथ अन्य जानकारी भी प्राप्त कर लेता है। ऐसी छवि का निर्माण यांत्रिक ढंग से अपने आप होता है। इस प्रकार की मुलाकात के उद्देश्य के अनुसार आप स्वत: ही इन शीलगुणों के आधार पर व्यक्ति के बारे में धनात्मक या ऋणात्मक मूल्य प्रदान कर देते हैं। अधिगम उपागम का आश्रय लेते हुए एंडरसन ने पहले योगात्मक नियम का प्रतिपादन किया। सबसे पहले उन्होने कहा कि प्रत्यक्षीकृत शीलगुणों के मूल्यों का योग ही व्यक्ति की सम्यक छवि की परिचायक होती है।


यह अधिक या कम धनात्मकता भी हो सकती है। धनात्मक छवि उपागम अनुक्रिया अर्थात आकर्षण उत्पन्न करती है। इसके विपरीत ऋणात्मक छवि विकर्षण उत्पन्न करती है और प्रत्यक्ष करने वाले व्यक्तियों में छोड़ देने की अनुक्रिया उत्पन्न कर देती है।

एंडरसन ने स्वयं के और अपने सहयोगियों के अनुसंधान परिणामों के आधार पर योगात्मक नियम के स्थान पर औसतीकरण नियम का प्रतिपादन किया। इस नियम के अनुसार किसी भी प्रेक्षक के लिए किसी व्यक्ति की सम्यक छवि उसके शीलगुणों के मूल्य योग के औसत मान के बराबर होती है। उदाहरण किसी विद्यार्थी को छात्रावास में ऐसा पार्टनर मिलता है, जिसके शीलगुणों को प्रत्यक्ष करने वाला उपरोक्त सारिणी में प्रस्तुत मूल्य निर्धारित करता है। औसतीकरण नियम के आधार पर प्रत्यक्षीकृत व्यक्ति की सम्यक छवि सामान्य रूप से ऋणात्मक है। योगात्मक नियम के अनुसार भी सम्यक छवि ऋणात्मक है। इतनी समानता होते हुए भी दोनों नियमों में एक प्रमुख अंतर भी है। किसी भी व्यक्ति की सम्यक छवि की धनात्मकता अतिरिक्त धनात्मक सूचना प्राप्त होने पर बढ़ जाती है. और ऋणात्मक सूचना प्राप्त होने पर व्यक्ति की सम्यक छवि की धनात्मकता कम हो जाती है तथा ऋणात्मक छवि की ऋणात्मकता बढ़ जाती है। किंतु औसती नियम के अनुसार यह के आवश्यक नहीं है कि अतिरिक्त सूचना प्राप्त होने पर सम्यक छवि की धनात्मकता या ऋणात्मकता में अंतर उत्पन्न हो। ऐसा तभी होता है जब अतिरिक्त सूचना से ज्ञात शीलगुण का मूल्य औसत मूल्य से अधिक होता है। एंडरसन के द्वारा प्रतिपादित औसतीकरण नियम का पहला अवयव था प्रथम छवि तथा दूसरा अवयव था शीलगुण भार।