उदारवादी स्त्रीवाद - Liberal feminism
उदारवादी स्त्रीवाद - Liberal feminism
उदारवाद राजनीतिक चिंतन की एक विचारधारा है। इसके आरंभिक विचारकों में जेरमी बेंथम का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। उदारवादी स्त्रीवाद स्त्रियों द्वारा स्वयं के बारे में पुनसैंद्धांतीकरण, पुनर्विचार और पुनर्रचना की व्यापक प्रक्रिया है। वस्तुतः उदारवादी स्त्रीवाद उदारवाद की दार्शनिक परंपराओं का अनुगमन करता है, जो 17वीं आर 18वीं सदी के दौरान पश्चिमी जगत में घटित आर्थिक, सामाजिक एवं राजनीतिक परिवर्तनों की उपज थी। एलिसन जैम्गर उदारवादी स्त्रीवाद के संदर्भ में अपनी राय प्रकट करते हुए कहती हैं कि, “दरअसल उदारवादी राजनीतिक चिंतन समान्यतः हमारी एकरूपता को दर्शाने के साथ मानवातावादी विचार को आगे बढ़ाते हुए तर्कविधान और बुद्धिवाद की पैरोकारी करता है।
” प्रबोधनकालीन व्यक्तिवादी, प्राकृतिक एवं तर्क आधारित सामाजिक बुनावट के बरक्स पूरी दुनिया में स्त्रियों की पहचान पत्नी और माँ की भूमिका में ही थी। हालांकि 18वीं सदी की कुछ स्त्रीवादी अथवा स्त्री समर्थनकारी विचारों ने पश्चिमी जगत को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। फ्रांस की क्रांति के दौरान ही ओलम्पी द गुजे ने पेरिस की गलियों में स्त्री अधिकारों के पर्चे भी बाँटे। स्त्रीवादी चिंतकों को प्रबोधनकालीन उदारवाद के आदर्शों से ओतप्रोत व्यक्तिवादी, प्रकृतिवादी, समानतावादी और मानवतावादी बदलाओं से उम्मीद थी। लेकिन उदारवाद की बुनियाद बने आजादी, समानता और न्याय के छद्म विचार सत्ताहीनता और घर की चहारदीवारी तक सीमित की गई स्त्रियों के वास्तविक जीवन के अनुभवों से पूर्णतः विपरीत थे। इस परिवर्तनगामी प्रबोधनकालीन उदारवादी धारा में उन्हें शामिल नहीं किया गया।
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