प्रक्षेपी विधि की सीमायें - Limitations of Projective Method

 प्रक्षेपी विधि की सीमायें - Limitations of Projective Method


इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मनोवैज्ञानिक परीक्षण के क्षेत्र में प्रक्षेपी विधियों का अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। और खासकर व्यक्तित्व के मापन में, फिर भी कुछ विद्वानों ने कतिपय आधारों पर प्रक्षेपी विधियों की आलोचना की है। आइजेन्क ने निम्न आधारों पर प्रक्षेपण परीक्षण की आलोचना की है-


1. अर्थपूर्ण तथा परीक्षणीय सिद्धान्त का अभाव- आइजेन्क का कहना है कि प्रक्षेपी विधियों का कोई परीक्षणीय तथा अर्थपूर्ण सिद्धान्त नहीं है। अतः इनके द्वारा जो व्यक्तित्व का मापन किया जाता है, उससे व्यक्तित्व के बारे में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलता है।


2. आत्मनिष्ठ प्राप्तांक लेखन प्रक्षेपण परीक्षण की आलोचना इस आधार पर भी की गई है कि इन परीक्षणों का प्राप्तांक लेखन एवं व्याख्या अत्यधिक आत्मनिष्ठ है, जिसके कारण तक ही व्यक्ति के व्यक्तित्व का मापन यदि अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किया जाता है तो उस व्यक्तित्व के बारे में उनके निष्कर्षों में भी भिन्नता पाई जाती है, जो किसी भी प्रकार से अर्थपूर्ण नहीं होता है।


3. उच्च वैधता का अभाव- आलोचकों का यह भी मत है कि प्रक्षेपी विधियों में पर्याप्त वैधता का अभाव पाया जाता है।


4. प्रक्षेपीय परीक्षण के सूचकों तथा शीलगुणों के बीच प्रत्याशित संबंध का वैज्ञानिक आधार नहीं- आइजेन्क ने प्रक्षेपण परीक्षण की आलोचना इस आधार पर भी की है

कि प्रक्षेपीय परीक्षण के सूचकों तथा शीलगुणों के बीच प्रत्याशित संबंध का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। इस प्रकार अनेक आधारों पर प्रक्षेपी विधियों की आलोचना की गई है।


उपर्युक्त विवरण से आप जान चुके हैं कि प्रक्षेपी विधि क्या है? प्रक्षेपण क्या हैं? प्रक्षेपी विधि में कौन-कौन से प्रमुख परीक्षण आते हैं और उनके क्रियान्वयन का तरीका क्या है। यद्यपि विद्वानों ने अनेक तर्क देकर प्रक्षेपी विधि की आलोचनायें की है तथापि मनोचिकित्सा की दृष्टि से व्यक्तित्व मापन में प्रक्षेपी विधियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।