भाग्य - Luck

 भाग्य - Luck


विभिन्न प्रायोगिक अध्ययनों में सफलता अथवा असफलता का गुणारोपण भाग्य पर होते हुए उस समय पाया गया है, जब किसी भी कारण से व्यक्ति यह विश्वास कर ले कि उसके प्रयत्नों के परिणाम मात्र संयोग पर आधारित है तथा उसकी योग्यता अथवा प्रयत्न की मात्रा का उसमें कोई योगदान नहीं है। भाग्य के गुणारोपण में संकृत्य की प्रकृति भी महत्वपूर्ण संकेत का कार्य करती है। उदाहरण ताश के पत्तों के के खेल में, सिक्का उछालने में अथवा किसी प्रकार की जुआ खेलने में सफलता / असफलता का गुणारोपण भाग्य पर किया जाता है। यदि सफलता तथा असफलता यादृच्छिक क्रम में प्राप्त हो रही हो तथा योग्यता अथवा कौशल इत्यादि कारकों की इसमें कोई भूमिका दिखाई ना दे रही हो, तो ऐसी स्थिति में भी सफलता / असफलता का गुणारोपण भाग्य पर ही होता है। सफलता असफलता के गुणारोपण में निहित मानसिक प्रक्रम एवं गुणारोपण से व्यक्ति की अभिवृत्तियों एवं व्यवहारों में उत्पन्न होने वाले परिवर्तनों का मनोवैज्ञानिकों ने गहन अध्ययन किया है। किसी भी व्यक्ति को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में हमेशा सफलता/असफलता ही नहीं मिलती। जबकि व्यक्ति सफल/असफल होता है, वह स्वभावतः उसके कारणों का गुणारोपण करता है। ऐसी स्थिति में दूसरे व्यक्ति के प्रति एवं स्वयं के प्रति भी उसकी अभिवृत्तियों में परिवर्तन आ जाता है, जो आगे चलकर उसके व्यवहार को एवं पूरे व्यक्तित्व को प्रभावित करता है।