प्रमुख शिक्षा समितियाँ - Major Education Committees
प्रमुख शिक्षा समितियाँ - Major Education Committees
स्वतंत्रता के पश्चात् शैक्षिक समस्याओं का अध्ययन करने तथा उनका समाधान करने के लिए अनेक समितियों का गठन किया गया जिनका विवरण निम्नानुसार हैं -
• आचार्य नरेन्द्र देव समिति इस समिति का गठन उ.प्र. सरकार द्वारा सन् 1952 में किया था। समिति ने उत्तर प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा के विभिन्न पक्षों तथा पाठ्यक्रम के सम्बंध में अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिये।
• दुर्गाबाई देशमुख समिति- सन् 1957 में लड़कियों की शिक्षा में सुधार लाने के लिए इस समिति का गठन किया गया जिसमें लड़कियों की शिक्षा के संबंध में कई सुझाव सरकार को दिये।
• श्री प्रकाश समिति – सन् 1959 में गठित इस समिति ने धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा की जरूरत एवं इसकी पाठ्यवस्तु में सम्बन्ध पर अपने सुझाव रखें।
• सम्पूर्णानंद समिति इस समिति ने राष्ट्रीय एकता को बनाये रखने के लिए शिक्षा के योगदान के संबंध में सुझाव सरकार को दिये। इसका गठन 1961 में किया गया था।
• हंसा मेहता समिति - इस समिति का गठन शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर लड़कियों के पाठ्यक्रम बनाने के लिए किया था। समिति ने इस विषय पर अपने सुझाब सरकार को दिये इसका गठन 1964 में किया गया था।
• 10+2+3 राष्ट्रीय समिति राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1968 में 10+2+3 शैक्षिक संरचना को भारत सरकार ने स्वीकार किया था।
इस संरचना को लागू करने के लिए इस समिति का गठन 1973 में किया गया था जिसने उनके महत्वपूर्ण सिफारशें की।
• पटेल समिति - एन.सी.ई.आर.टी के द्वारा (10 वी तक) तैयार किये गये पाठ्यक्रम एवं पुस्तकों के पुनरीक्षण के लिए सन 1977 में ईश्वर भाई जे पटेल की अध्यक्षता में इस समिति का गठन किया गया। इस समिति ने पाठ्यक्रम का पुनरीक्षण कर अपने सुझाव दिये।
• अदिशेषैया समिति- +2 स्तर के पाठ्यक्रम की जाँच एवं शिक्षा के व्यवसायीकरण के विशेश संदर्भ में करने के लिए इस समिति का गठन 1977 में किया गया। इस समिति ने समाजोपयोगी उत्पादक कार्य पाठ्यक्रम में जोड़ने की सिफारिश की।
• ज्ञानम समिति सन् 1987 में प्रो. ए. ज्ञानम की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय प्रबन्धन से सम्बन्धित विभिन्न मुद्दों के विस्तृत अध्ययन करने के लिए इस समिति का गठन किया गया। इस समिति ने विश्वविद्यालय संरचना भूमिका उत्तरदायित्वों की समीक्षा कर शैक्षिक संस्थाओं के निष्पादन के आंकलन सम्बन्धी अनेक दिये। सुझाव
• यशपाल समिति – सन् 1992 में प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने स्कूली छात्रों के शैक्षिक बोझ को अधिगम की गुणवत्ता बनाये रखते हुए कम करने के संबंध में अनेक सुझाव दिये।
• उच्च शिक्षा का पुनरोद्धार एवं नवजीवन समिति सन् 2008 में प्रो. यशपाल की अध्यक्षता में गठित इस समिति ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा को नया स्वरूप देने के लिए सुझाव दिये। इसने कार्य कर रहे अनेक आयोगों एवं परिषदों के स्थान पर एक ही वियामक संस्था बनाने का महत्वपूर्ण सुझाव दिया।
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