प्रकार्यात्मक विश्लेशण के प्रमुख चरण - Major steps of functional analysis

प्रकार्यात्मक विश्लेशण के प्रमुख चरण - Major steps of functional analysis


संरचनात्मक प्रकार्यात्मक विश्लेषण की पद्धति के प्रमुख चरण समाजशास्त्र में प्राणीशास्त्र के आधार पर विकसित हुई है। प्राणीशास्त्री कैनन (Cannon) के अनुसार प्रथमतः शरीर की निरंतरता और स्थायित्व की दशाओं का यथार्थ एव विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना चाहिए। इसके उपरांत उन यंत्रों एवं तत्वों की व्याख्या करना चाहिए जो निरंतरता और स्थायित्व की दशाओं की पूर्ति करते हैं। मर्टन ने इसी आधार पर प्रकार्यात्मक विश्लेषण के प्रमुख चरणों का समाज के अध्ययन के लिए प्रतिपादन किया है, जो निम्नलिखित हैं:


(1) प्रकार्यात्मक आवश्यकाओं की प्रस्थापना (Establishment of Functional Requirements)


सर्वप्रथम, सावयव अर्थात् समाज के अस्तित्व समाज के अस्तित्व एवं निरंतरता के लिए प्रकार्यात्मक आवश्यकताओं की स्थापना की जाती हैं। 


(2) संरचना और प्रक्रियाओं की व्याख्या (Explanation of Structure and Processes) 


फिर उन संरचनाओं और प्रक्रियाओं की व्याख्या तैयार की जाती है जो इन आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। 


(3) पूरक यंत्रों की खोज (Search of Compensation Mechanisms or Structure of Functional Alternates)


यदि कुछ प्रकार्यों की पूर्ति करने वाली संरचनाएँ या प्रक्रियाएँ स्पष्ट नहीं होती हैं, तो यह प्रयत्न किया जाता है कि पूरक यंत्रों या प्रकार्यात्मक विकल्पों (Functional Alternates ) की खोज की जाए। 


(4) संरचना का विस्तृत विवरण (Detailed Description of the Structure)


उस संरचना का विस्तृत विवरण भी तैयार किया जाता है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है। उसके हर पक्ष का वर्णन आवश्यक है।


(5) प्रकार्यात्मक व्यवस्थाओं का विस्तृत विवरण (Detailed Description of the Functional Systems)


उन प्रकार्यात्मक व्यवस्थाओं. जो कि उन आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं. का भी विस्तृत विवरण तैयार करना होता है।