दूर शिक्षा के प्रमुख सैद्धांतिक आधार - Major Theoretical Basis of Distance Education
दूर शिक्षा के प्रमुख सैद्धांतिक आधार - Major Theoretical Basis of Distance Education
इसमें हम दूर शिक्षा को सैद्धांतिक आधार प्रदान करने वाले प्रमुख तत्वों को हम निमनांकित ढंग से वर्गीकृत कर सकते हैं -
(क). सामाजिक दर्शन
(ख). शिक्षण अधिगम का मनोविज्ञान
(ग). अनुदेशन के सिद्धांत
(घ). सम्प्रेषण माध्यम की विधियाँ
(ङ). संरचनात्मक व्यवस्था या प्रणाली
सामाजिक दर्शन -
शिक्षा एक सामाजिक आवश्यकता है। अतः शिक्षा का लक्ष्य समाज में हो रहे परिवर्तनॉन एवं आवश्यकताओं के अनुकूल होना चाहिए। चुकि औपचारिक शिक्षा अनेक औपचारिकताओं, प्रतिबंधों एवं समझौतों से अधिक जकड़ी हुई है जिसके कारण वह आधुनिक समाज की आवश्यकताओं को पूर्ण करने में सफल नहीं हो पा रही है। अतः आज के मुक्त समाज में शिक्षा में भी अधिक स्वायत्ता की आवश्यकता है। सामाजिक, आर्थिक एवं राजनाइटिक आवश्यकताओं के प्रति शिक्षा का दायित्व मुख्य रूप से समाज के स्वरूप तथा उसे स्वीकार्य विकास के प्रकार पर निर्भर करता है। अतः सामाजिक दर्शन शैक्षिक व्यवस्था अथवा प्रणाली के विकास एवं उसमें परिवर्तन को आधार प्रदान करता है।
शिक्षण अधिगम का मनोविज्ञान
दूर शिक्षा के अंतर्गत शिक्षण अधिगम के चारों एवं उनके सम्बन्धों की नए ढंग से व्यवस्था करने एवं नवीन अर्थापन करने का प्रयास किया गया है।
शिक्षण अधिगम प्रक्रिया के बारे में दूर शिक्षा की अवधारणायें इस प्रकार हैं -
1 अधिगम मूल रूप में व्यक्तिगत प्रक्रिया है। अध्ययन की सहायक सुविधाएं व्यक्तिगत अधिगम प्रक्रिया का अंग होती है।
2 अधिगम का आनंद ही छात्रों को अध्ययन हेतु अभिप्रेरित करता है।
3 छात्रों की अभिप्रेरणा ही उनके अध्ययन में सहायक होती है।
4 छात्रों का अध्ययन में अधिक सक्रिय होना उनकी अभिप्रेरणा को दर्शाता है।
5 शिक्षण (प्रस्तुतीकरण) की प्रभावशीलता का मानदंड छात्रों का अधिगम होता है इत्यादि। शिक्षण अधिगम की उपर्युक्त अवधारणाएँ दूर शिक्षा को सैद्धांतिक आधार प्रदान करती है।
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