नगरीय समुदाय का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and Definition of Urban Community
नगरीय समुदाय का अर्थ एवं परिभाषा - Meaning and Definition of Urban Community
नगर शब्द अंग्रेजी भाषा का 'Urbun' शब्द का हिंदी अनुवाद है। स्वयं Urban शब्द लैटिन भाषा के “Urbanus" से बना है जिसका अर्थ है 'शहर'। लैटिन भाषा के 'Urbs' का अर्थ भी सिटी अर्थात शहर से ही है।
वर्तमान नगर औद्योगिकरण की ही देन है। जब एक स्थान पर विशाल उद्योग स्थापित हो जाता है तो उस स्थान पर कार्य करने के लिए लोग उमड़ पड़ते हैं और धीरे-धीरे वह स्थान नगर के रूप में विकसित होता चला जाता है। ग्रामीण समुदाय के अर्थ के तारतम्य में हम समुदाय के अर्थ को भली-भांति समझ चुके हैं। उसी अर्थ को यदि हम यहां उपयोग में लाए तो नगरीय समुदाय का अर्थ होगा- मनुष्य का वह समुदाय जो नगर में रहता है। इस संदर्भ में एक सामान्य प्रश्न उत्पन्न होता है कि नगर क्या है? यद्यपि हम में से प्रत्येक नगर शब्द से परिचित हैं, हम में से अधिकांश व्यक्ति नगरों में रहते हैं फिर भी नगर क्या है इसे परिभाषित रूप में समझना कठिन है। सत्य तो यह है कि ग्राम और नगर के बीच कोई स्पष्ट विभाजक रेखा नहीं है जिसके आधार पर ग्राम और नगर को पृथक किया जा सके।
केवल विशेषताओं के आधार पर ही ग्राम और नगर की अवधारणा तथा दोनों के बीच अंतर को स्पष्ट किया जा सकता है अथवा उनकी विशेषताएं बतलाई जा सकती हैं। नगरीय समाजशास्त्र के अध्ययन के द्वारा कुछ आधारों पर नगर क्या है इसे समझाने का प्रयास किया गया है। इसके अनुसार दी गई कुछ व्याख्या इस प्रकार हैं। प्रायः नगर को जनसंख्या के आधार पर चिन्हित किया जाता है। भारत में बहुतायत ऐसे आवासीय क्षेत्र हैं जिनकी जनसंख्या एक लाख अथवा उससे अधिक हो. उन्हें नगर कहते हैं। नगर को चिन्हित करने के लिए जनसंख्यात्मक मापदंड सर्वत्र एक समान नहीं है उदाहरणस्वरुप 25.000 या इससे अधिक जनसंख्या वाले स्थान को अमेरिका के जनगणना ब्यूरो ने नगर माना है। फ्रांस ने 20,000 तथा मिस्र ने 11,000 जनसंख्या वाले क्षेत्र को नगर माना है। विलकॉक्स ने ऐसे क्षेत्र को जहां का जनघनत्व 1000 व्यक्ति प्रति वर्ग मील तथा जेफरसन ने 10.000 प्रति वर्ग मील आबादी वाले क्षेत्र को नगर कहा है। नगर की व्याख्या करने का एक आधार जीवनशैली भी है। नगर में रहने वालों की दिनचर्या, जीवनस्तर, शिक्षा का स्तर ग्रामों से भिन्न होता है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि जिन आवासीय बस्तियों के लोगों की जीवनशैली नगरीय हो उसे नगर कहते हैं।
इसी प्रकार कुछ विद्वानों ने सुविधाओं के आधार पर भी नगरों की व्याख्या किया हैं। उनके अनुसार जहां शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार व्यवसाय, आवागमन और संचार के उन्नत साधन उपलब्ध उपलब्ध हों उन्हें नगर कहते हैं।
बर्गल ने उचित ही कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति यह जानता है कि नगर क्या है किंतु किसी ने भी संतोषजनक परिभाषा नहीं दी हैं। (Everybody seems to know what city is but no one has given a satisfactory definition E. B. Bergal, Urban Sociology )"नगर केवल एक विकास का स्थान ही नहीं बल्कि एक विशिष्ट पर्यावरण का सूचक भी है। यह जीवन जीने की एक विशिष्ट ढंग और विशिष्ट संस्कृति का भी सूचक है। नगरों की जनसंख्या अधिक होती है. इसका जनघनत्व भी अधिक पाया जाता है, व्यवसायियों की बहुलता एवं भिन्नता औपचारिक व द्वितीयक संबंधों की प्रधानता, भौतिकवाद, व्यक्तिवाद, कृत्रिमता, जटिलता, गतिशीलता आदि नगरीय जीवन की प्रमुख लक्षण हैं।
भिन्न-भिन्न विद्वानों द्वारा भिन्न-भिन्न परिप्रेक्ष्य में नगर की कुछ परिभाषाएं भी दी गई हैं जो इस प्रकार है विलकॉक्स के अनुसार, "जहां मुख्य व्यवसाय कृषि हैं उसी गांव तथा कृषि के अतिरिक्त जहां अन्य व्यवसाय प्रचलित हैं उसे नगर कहेंगे।”
ई० ई० बर्गल ने व्यवसाय के आधार पर नगरों को ग्रामों से भिन्न माना है इसी आधार पर ये लिखते हैं कि नगर ऐसी संस्था है जहाँ के अधिकतर निवासी कृषि कार्यों के अतिरिक्त अन्य उद्योगों अथवा अन्य कार्यों में नियोजत हो।"
विलकॉक्स ने भी जीवन निर्वाह को किए जाने वाले आधार पर नगर शब्द को परिभाषित किया है। इनके अनुसार,"ग्राम और नगर में मूलभूत अंतर कृषि और अन्य उद्योगों का है. ग्राम कृषि कार्य के आधार पर तथा नगर उद्योग आधार पर पहचाने जाते हैं।"
लुईस बर्थ नगर को परिभाषित करते हुए लिखते हैं कि समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण से नगर की परिभाषा सामाजिक भिन्नता वाले व्यक्तियों के बड़े घने बसे हुए एवं स्थायी निवास के रूप में की जा सकती है। इनके अलावा इनका यह भी कहना है कि नगरवाद या नगरीयता एक जीवनशैली है (Urbanism is a way of life)"
थियोडोरसन एवं थियोडोरसन के अनुसार, "नगरीय समुदाय एक ऐसा समुदाय है जिसमें उच्च जनघनत्व, गैर कृषि व्यवसायों की प्रमुखता, जटिल श्रम विभाजन से उत्पन्न उच्च मात्रा का विशेषीकरण और स्थानीय सरकार की औपचारिक व्यवस्था पाई जाती है। नगरीय समुदायों की विशेषता जनसंख्या के विभिन्नता अवैयक्तिक एवं द्वितीयक संबंधों का प्रचलन तथा औपचारिक सामाजिक नियंत्रण पर निर्भरता आदि है।"
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