अवधारणा का अर्थ , अवधारणा की परिभाषाएं ,अवधारणा की विशेषताएं - Meaning of Concept, Definitions of Concept, Features of Concept

 अवधारणा का अर्थ , अवधारणा की परिभाषाएं ,अवधारणा की विशेषताएं - Meaning of Concept, Definitions of Concept, Features of Concept

करता है। तथ्यों के एक वर्ग की इस संक्षिप्त स्थिति अभिव्यक्ति को ही विज्ञान में अवधारणा कहा जाता है।


अवधारणा की परिभाषाएं


विभिन्न विद्वानों ने अपनी-अपनी परिभाषाओं के माध्यम से अवधारणा की विवेचना करने का प्रयास किया है। इनमें से कुछ परिभाषाएं निम्नलिखित इस प्रकार हैं -


गुडे तथा हॉट के अनुसार, "अवधारणा अमूर्त स्वरुप की होती है और वास्तविकता के कुछ ही विशेष पक्षों का प्रतिनिधित्व करती हैं।"


चाइल्ड के अनुसार, "यह विशेष मौलिक संकेत, जोकि समाज के वैज्ञानिक अवलोकन व चिंतन से निकाले गए सामान्यीकृत विचारों को दिए जाते हैं, अवधारणा कहलाते हैं।" 


मिचेल के अनुसार, "अवधारणा एक विवरणात्मक गुण या संबंध की ओर संकेत करने वाला एक पद है।"


पी.वी. यंग के अनुसार, "सामाजिक विश्लेषण की प्रक्रिया में अन्य तथ्यों से पृथक किए गए तथ्यों के एक वर्ग को एक अवधारणा का नाम दिया जा सकता है।" 


ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के अनुसार, "अवधारणा वस्तु के एक वर्ग का विचार अथवा सामान विचार होता है।"


इस प्रकार वस्तुओं और घटनाओं को समझने के लिए प्रयुक्त किए जाने वाले पदों को ही अवधारणा कहा जाता है। 


अवधारणा की विशेषताएं


उपर्युक्त परिभाषाओं के आधार पर अवधारणा की निम्नलिखित विशेषताएं निर्धारित की जा सकती हैं-


1. अवधारणा के एक वर्ग या समूह की एक ऐसी संक्षिप्त परिभाषा होती है जिसे कि एक-दो शब्दों में व्यक्त किया जाता है।


2. अवधारणा किसी घटना या व्यवहार प्रतिमान की संपूर्ण व्याख्या नहीं अपितु उसका एक संकेत मात्र होती है।


3. अवधारणा का निर्माण वैज्ञानिक निरीक्षण या चिंतन के आधार पर होता है। यह अनुमान मात्र नहीं है। 


4. अवधारणा का अर्थ एक तार्किक आधार होता है और उसका निर्माण प्रत्यक्ष ज्ञान वास्तविक निरीक्षण व यथार्थ अनुभव के बल पर होता है।


5. अवधारणा अपने में अर्थयुक्त होती है क्योंकि यह तथ्यों के एक निश्चित समूह या वर्ग में पाए जाने वाली विलक्षणताओं की दोतक होती है।


6. अवधारणा स्वयं सिद्धांत का संक्षिप्त रूप नहीं होती अपितु तथ्यों के एक वर्ग की विशेषताओं को संक्षेप में बताने वाली होती हैं।


7. अवधारणा में आवश्यकतानुसार परिवर्तन भी होता रहता है। नए ज्ञान के संचय होने, वैज्ञानिक विशेष के दृष्टिकोण में परिवर्तन होने अथवा तथ्यों के पारस्परिक संबंधों का कोई नया स्वरूप प्रकट होने पर अवधारणाओं में परिवर्तन हो जाता है।