समाजशास्त्र का अर्थ - Meaning of Sociology
समाजशास्त्र का अर्थ - Meaning of Sociology
सोसियोलॉजी का सर्वप्रथम प्रयोग फ्रांस के एक दार्शनिक ऑगस्ट कॉम्टे ने 1837 में किया था। उन्होंने कहा कि समाजशास्त्र एक विज्ञान है यह सभी विज्ञानों का समन्वय है तथा इसका उपयोग सामाजिक पुनर्निमाण में करना चाहिये। इन्हें समाजशास्त्र का जन्मदाता कहा जाता है। समाजशास्त्र अंग्रेजी भाषा के सोसियोलॉजी का हिन्दी रूपान्तर है यह दो शब्दों सोसियो (Socio) तथा लॉजी (Logy) से मिलकर बना है। सोसियो का अर्थ है समाज एवं लॉजी का अर्थ होता है शास्त्र इस प्रकार इसे म समाजशास्त्र कहते है जिसका अर्थ हुआ समाज का विज्ञान मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज में जन्म लेता है समाज में ही उसका विकास होता है बिना समाज के उसका कोई जीवन नहीं होता अतः उसकी सम्पूर्ण क्रिया समाज में ही सम्पन्न होती है।
अत: व्यक्ति पर समाज का और समाज का व्यक्ति पर प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति तथा समाज में सदैव अन्तःक्रिया चलती रहती है। इस परस्पर चलने वाली अन्तः क्रिया में अनेक सामाजिक प्रक्रियाचें तथा सामाजिक तत्व सम्मलित होते हैं, ये सभी सामाजिक तत्व समाजशास्त्र की विषय वस्तु हैं।
• समाजशास्त्र सामाजिक प्रक्रियाओं तथा सामाजिक तथ्यों का वैज्ञानिक अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र मानव के बहुमुखी व्यवहार का अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र सामाजिक समस्याओं जो व्यक्ति, परिवार, समाज, धर्म, राज्य, जाति, वर्ग आदि से संबंध रखती है।
• समाजशास्त्र समस्याओं की प्रकृति का अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र मानव पर प्रभाव डालने वाले तत्वों जेसे रीति-रिवाज, परम्परायें सामाजिक संस्थाये आदि का अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र सम्पूर्ण मानव संस्कृति का अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र सामाजिक विघटन एवं सामाजिक परिवर्तनों के विकास के कारण एवं निवारण के उपायों का अध्ययन करता है।
• समाजशास्त्र सामाजिक संगठनों का अध्ययन उसके प्रमुख आधारों द्वारा करता है जिसके कारण समाज में सहयोग, सहानुभूति तथा संवेदना की स्थिति बनती है।
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