छवियों का मापन - measurement of images

छवियों का मापन - measurement of images


व्यक्ति द्वारा किसी व्यक्ति के संबंध में प्राप्त सूचनाओं को संयुक्त कर उसका मूल्यांकन करने के लिए आवश्यक है कि छवि का मापन किया जाये। इस मापन के लिए शब्दार्थ विभेदक तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक को आसगुड, सूशी एवं टैननबाम (1957) ने विकसित किया। इस तकनीक के माध्यम से किसी भी संप्रत्यय, वस्तु, अभिवृत्ति या छवि के अर्थ एवं तात्पर्य का मापन किया जाता है। इसके लिए द्विछोरीय विशेषण युग्मों को लिया जाता है। इन युग्मों में से एक को सात बिन्दुओं वाली मापनी के एक छोर पर और दूसरे को दूसरे छोर पर लिख दिया जाता है। यह विशेषण युग्म में इस प्रकार चयनित होते हैं कि युग्म का एक सदस्य दूसरे सदस्य का विलोम होता है। प्रत्येक मापनी के दोनों छोरों पर विशेषण लिखे गए होते हैं। इसलिए इन मापनियों को द्विछोरीय कहा जाता है। प्रस्तुत सारिणी में इसे स्पष्ट किया गया है।


नैतिक -  अनैतिक


सुंदर - कुरूप 


सक्रिय - निष्क्रिय


विश्वसनीय - अविश्वसनीय


बुद्धिमान - मूर्ख


स्वार्थी - परोपकारी


प्रबल - दुर्लभ


गंभीर - सतही


सिद्धांतवादी - अवसरवादी


मान लीजिए कि आप किसी साक्षात्कार समिति के पाँच सदस्यों में से एक हैं। यह साक्षात्कार समिति किसी पद पर उपयुक्त व्यक्ति का चयन करने के लिए है और आये सभी अभ्यर्थियों का एक-एक कर उनका साक्षात्कार ले रही है।

जब कोई अभ्यर्थी साक्षात्कार कक्ष में प्रवेश करता है तो समिति के प्रत्येक सदस्यों का ध्यान उसपर केंद्रित होता है। सभी सदस्य, उस अभ्यर्थी की शारीरिक बनावट, वेशभूषा, चेहरे का भाव तथा उसके चलकर निर्धारित स्थान तक पहुंचने की क्रिया को देखते हैं। आप सभी सदस्य उससे प्रश्न पूछते हैं और उसके द्वारा दिए गए उत्तर का विषय-वस्तु की उपयुक्तता से तथा उत्तर देते समय अभ्यर्थी के हाथों की क्रियाओं का अनुभव करते हैं। ऐसा करते हुए आप प्रत्येक सदस्य उस अभ्यर्थी की एक छवि का निर्माण कर लेते हैं। इस प्रकार निर्मित छवि का मापन करने के लिए शब्दार्थ विभेदक मापनी का उपयोग किया जा सकता है। चयन समिति के सदस्यों ने किसी अभ्यर्थी की कैसी छवि निर्मित की है, का मापन करने के पहले यह निश्चित कर लिया जाता है कि किन शीलगुणों को छवि के निर्माण में मापना है। मान लीजिए कि जिस पद के लिए चयन किया जा रहा है, चयनित व्यक्ति में शालीनता, गंभीरता, बुद्धि, कौशल, परिपक्वता, विद्वता, सुसंस्कृत एवं उदारता के गुणों का होना आवश्यक माना गया है। अतः समिति के प्रत्येक सदस्य द्वारा निर्मित छवि का मापन करने के लिए प्रस्तुत शब्दार्थ विभेदक मापनी का उपयोग किया जा सकता है।


अतिशालीन - न्यू शालीन


गंभीर हल्का कुशल - अकुशल


अति बुद्धिमान - न्यून बुद्धिमान


विद्वान - मूर्ख


सुसंस्कृत - संस्कृत


उदार - अनुदार


सभी सदस्यों से सारणी में दिए गए शीलगुणों की मापनियों पर उनकी रेटिंग ली जा सकती है। उनकी प्रतिक्रिया देने के लिए सात बिंदु हैं। धनात्मक अथवा वांछनीय तथा उनके विपरीत ऋणात्मक विशेषण के बीच क्रमशः +3,+2, +1. 0, 1. -2 तथा 3 के मूल्य निर्धारित किये गये हैं। इन्हीं मूल्यों के अनुसार अभ्यर्थियों की विशेष छवि का आकलन या मापन किया जा सकता है।