दूर शिक्षा में शिक्षण माध्यम - medium of instruction in distance education

 दूर शिक्षा में शिक्षण माध्यम - medium of instruction in distance education


अनुदेशनात्मक माध्यम की शिक्षण अधिगम प्रक्रिया एवं शिक्षा के उद्देश्य की प्राप्ति की दृष्टि महत्वपूर्ण भूमिका एवं योगदान है। शिक्षण अधिगम प्रक्रिया को प्रभावशाली बनाने में माध्यमों का सार्थक उपयोग है। माध्यमों का उपयोग कक्षा शिक्षण तथा दूर शिक्षा दोनों में ही किया जाता है।


शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया में शिक्षण विधि एवं शिक्षण माध्यम दोनों ही समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। शिक्षण विधियों का पाठ्य-पुस्तक के प्रस्तुतीकरण और शिक्षण माध्यमों का पाठ्यवस्तु के सम्प्रेषण में प्रयोग किया जाता है। शिक्षा विधि का संबंध पाठ्यवस्तु तथा सामय से होता है, और माध्यम का संबंध छात्र एवं शिक्षक की परस्परिक दूरी से होता है।

माध्यम के उपयोग से दूरी हेतु सुविधा प्रदान की जाती है, माध्यम से छात्रों के घर तक पहुंचा जाता है। आमने-सामने के शिक्षण में पाठ्यपुस्तक के प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण हेतु समुचित शिक्षण विधियों का प्रयोग करते हैं। माध्यम के अंतर्गत शिक्षण विधि सम्मिलित होती है। दूर शिक्षा में माध्यम तथा विधि दोनों ही समान रूप से उपयोगी होती हैं, जबकि कक्षा शिक्षण में शिक्षण विधि का उपयोग अधिक होता है।


दूर शिक्षण में मूलभूत में बहु- माध्यम प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है। साधारणतः मुद्रित माध्यम को अधिक विश्वसनीय तथा उपयोगी माना जाता है। मुद्रित माधायम अन्य माध्यमों एवं प्रविधियों द्वारा पूरा किया जाता है। सहायक माध्यम के रूप में प्रयुक्त करते हैं। आज तकनीकी का युग है, इसलिए दूर शिक्षा प्रणाली में मुद्रित माध्यमों का उपयोग किया जाता है, जो मुद्रित माध्यमों की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली है। दूर शिक्षा में प्रयुक्त किए जाने वाले माध्यमों को दो वर्गों में विभाजित कर सकते हैं -


I. मुद्रित अनुदेशन माध्यम तथा


II. अमुद्रित अनुदेशन माध्यम मुद्रित अनुदेशनात्मक माध्यम का उपयोग पत्राचार शिक्षा में होता है।

मुद्रित अनुदेशन पाठ सामाग्री को डाक द्वारा छात्रों तक पहुंचाई जाती है। इसे डाक शिक्षा की संज्ञा दी जाती है।


अमुद्रित अनुदेशनात्मक माध्यमों का प्रयोग दूर शिक्षण में किया जाता है, जिसमे रेडियो तथा दूरदर्शन के प्रसारण द्वारा पाठ्यवस्तु का सम्प्रेषण किया जाता है।


मुद्रित पाठ्यवस्तु अथवा पाठ्यपुस्तक का प्रयोग साधारणतः सभी करते हैं। यह सामान्य सम्प्रेषण का माध्यम नहीं कह सकते है, क्योंकि इससे अधिक प्रभावशाली माध्यम विकसित किए जा चुके हैं,जिन्हें आधुनिक अमुद्रित माध्यम अथवा तकनीकी माध्यम कहते हैं, जिनसे दूर शिक्षा के छात्रों को सीखने की सुविधा दी जाती है। मुद्रित माध्य की अपेक्षा अधिक प्रभावशाली होते हैं तथा शिक्षा की दृष्टि से अधिक उपयोगी सिद्ध हुए हैं इनका उपयोग सहायक माध्यम के रूप में भी किया जाता है।