समूह मनोबल को मापने की विधियां - Methods of Measuring Group Morale

समूह मनोबल को मापने की विधियां - Methods of Measuring Group Morale


समाज मनोवैज्ञानिकों ने समूह मनोबल को मापने के लिए विभिन्न विधियों का प्रतिपादन किया है. इनमें चार प्रमुख है जो निम्नलिखित हैं-


1- साक्षात्कार विधि- इस विधि द्वारा समूह का मनोबल मापने में समूह के सदस्यों का साक्षात्कार किया जाता है जिसमें भेंटकरता (interviewer) सदस्यों से समूह के मनोबल के विभिन्न पहलुओं जैसे समूह की एकता, एकात्मकता, आपसी संबंध, अन्य सदस्यों एवं समूह के नेता के प्रति मनोवृति आदि से संबंधित प्रश्नों को पूछता है और दिए गए उत्तरों का विश्लेषण करके यह पता लगाया जाता है कि समूह का मनोबल ऊंचा है या नीचा है।


साक्षात्कार का स्वरूप संरचित तथा और असंरचित कुछ भी हो सकता है. संरचित साक्षात्कार होने पर भेटकर्ता द्वारा समूह के सदस्यों से पूर्व निर्मित प्रश्नों को एक निश्चित क्रम में पूछता है. असंरचित साक्षात्कार में भेटकर्ता समूह के सदस्यों से जिन प्रश्नों को पूछता है वे ना तो पूर्व निर्मित होते हैं और ना ही उनका कोई क्रम होता है.

फल स्वरूप असंरचित साक्षात्कार में लचीलापन का गुण अधिक होता है, चाहे साक्षात्कार संरक्षित हो या असंरचित, इसे प्रारंभ करने के पहले भेंट करता को यह देख लेना होता है कि समूह का आकार क्या है? यदि समूह का आकार छोटा है तो वैसी परिस्थिति में सभी सदस्यों का साक्षात्कार किया जाता है. परंतु यदि समूह का आकार बड़ा है तो साक्षात्कार प्रारंभ करने से पहले उस बड़े समूह में से एक प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से ऐसा चुनता है जो पूरे समूह का सही सही प्रतिनिधित्व कर है सके और इस प्रतिदर्श के प्रत्येक सदस्य के साक्षात्कार द्वारा मनो बल की माप की जाती है. यदि इस प्रतिदर्श का मनोबल ऊंचा पाया जाता है तो समझा जाता है कि पूरे समूह का मनोबल ऊंचा होगा और यदि उस प्रतिदर्श का मनोबल नीचा होता है तो उस समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है. समूह मनोबल को मापने में साक्षात्कार विधि का प्रयोग प्रायः किया जाता है फिर भी इस विधि के कुछ दोष है जो निम्न है-


• इस विधि का सबसे प्रमुख दोष यह है कि इसमें आत्मानिष्ठता अधिक होती है


• इस विधि में यह भी देखा गया है कि साक्षात्कार करता साक्षात्कार में दिए गए उत्तरों के आधार पर समूह मनोबल के बारे में अंतिम निर्णय करते समय पक्षपात पूर्वाग्रह से काफी प्रभावित होते हैं, जिसके कारण है सही से निर्णय नहीं ले पाते हैं

• चुकी समूह के सदस्यों को पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देना होता है इसलिए कुछ सदस्य परिस्थिति की नवीनता के कारण घबराकर सही उत्तर नहीं दे पाते हैं. इस कारण समूह मनोबल के बारे में कुछ भी अंदाज लगाना मुश्किल हो जाता है।


2- समाजमिति विधि- समाजमिति विधि का प्रतिपादन मोरेनो (1943) द्वारा किया गया. जेनकिंस (1947) ने इसमें संशोधन किया और इसे मनोनयन विधि कहा है. जेनकिंस ने इस विधि का प्रयोग सफलतापूर्वक नौसेना के सदस्यों का मनोबल मापने में किया है, इस विधि में जिस समूह के सदस्यों का मनोबल मापना है, उनसे व्यक्तिगत रूप में यह पूछा जाता है कि किसके साथ मिलकर के साथ मिलकर वे समूह की क्रियाओं मैं हाथ बटाना पसंद करेंगे. प्रत्येक सदस्य अपने इस पसंदगी की अभिव्यक्ति गुप्त रूप से करता है. जब प्रत्येक सदस्य की पसंदगी का पता चलता है तो उसे एक विशेष चित्र द्वारा हम दिखाते हैं जिसे समाज आलेख कहा जाता है. इस आलेख पर नजर डालने से रचना के बारे में स्पष्ट रूप से कुछ ऐसी बातों का पता चलता है जिससे समूह मनोबल को आसानी से मापा जा सकता है. समूह के मनोबल का मापन समाजमिति विधि द्वारा वैज्ञानिक तरीके से होता है फिर भी इस विधि में कुछ दोष पाए गए हैं जो निम्न हैं.


• इस विधि द्वारा समूह के मनोबल का मापन तभी सही ढंग से होता है

जब समूह का आकार छोटा हो. फिशर के अनुसार जब समूह का आकार बड़ा होता है तो समाज आलेख से कुछ निश्चित निष्कर्ष निकालना कठिन हो जाता है. अतः समूह का आकार छोटा होने से समूह मनोबल का मापन आसानी से हो जाता है.


• समाजमिति विधि द्वारा समूह मनोबल के कुछ घटकों जैसे उपलब्धि स्तर, आकांक्षा स्तर, अहम आवेष्टन आदि का सही सही मापन नहीं होता है.


3- प्रश्नावली विधि- समूह मनोबल का मापन प्रश्नावली विधि द्वारा भी होता है. इस विधि में शोधकर्ता द्वारा समूह में एकता तथा सहयोग के द्वारा एक दूसरे के प्रति मनोवृति, नेता में विश्वास आदि के संबंध में छोटे-छोटे प्रश्नों या कथनों की एक सूची बना ली जाती है. इस सूची को प्रश्नावली कहा जाता है. प्रायः इन प्रश्नों या कथनों का उत्तर समूह के सदस्यों का हां या नहीं' के रूप में देना होता है, उनके द्वारा किए गए उत्तरों का सांख्यिकीय विश्लेषण करके समूह के मनोबल का मापन किया जाता है. सांख्यिकी विश्लेषण करने के बाद यदि यह पता चलता है कि समूह के सदस्यों का नेता में विश्वास है, तथा सदस्यों में एक दूसरे के प्रति आदर भाव, सहकारिता, एकता की भावना है तो, समूह का मनोबल ऊंचा समझा जाता है. परंतु यदि यह पता चलता है कि समूह के सदस्यों में उपयुक्त तथ्यों की कमी है तो ऐसा समझा जाता है कि समूह में मनोबल नीचा है. 

इन गुणों के अलावा भी प्रश्नावली विधि के कुछ दोष है जो निम्नलिखित हैं 


• अक्सर यह देखा गया है कि प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर को सदस्य छुपा लेते हैं और उसकी जगह पर मनगढ़ंत उत्तर दे देते हैं. इसका परिणाम यह होता है कि समूह के बारे में सही तस्वीर नहीं मिल पाती है और फिर उसके आधार पर मनोबल को सही-सही मापना संभव नहीं हो पाता है।


• प्रश्नावली विधि द्वारा समूह मनोबल मापने में कभी कभी एक और कठिनाई सामने आती है. ऐसा देखा गया है कि समूह के सदस्य अंगूठा छाप अर्थात अनपढ़ होते हैं. फल स्वरूप वे प्रश्नों को पढ़ नहीं सकते हैं. अतः ऐसे सदस्यों के विचारों को हम प्रश्नावली विधि द्वारा नहीं जान पाते हैं.


• कभी कभी कोई कोई सदस्य प्रश्नावली के कुछ प्रश्नों का उत्तर छोड़ देते हैं. ऐसी परिस्थिति में भी के इस विधि द्वारा समूह मनोबल को मापना संभव नहीं है.

• जब समूह का आकार बड़ा होता है और उसके सदस्य एक जगह पर ना होकर एक बड़े में भूभाग बिखरे होते हैं तो शोधकर्ता ऐसे समूह को मनोबल को मापन करने के लिए डाक प्रश्नावली का प्रयोग करता है. ऐसी परिस्थिति में समूह मनोबल का मापन सही सही करना संभव नहीं हो पाता है.


4- मनोवृति मापनी - समूह मनोबल को मापने के लिए समाज मनोवैज्ञानिक ने मनोवृति मापनी का भी सहारा लिया है. एक सदस्य की मनोवृत्ति दूसरे सदस्यों के प्रति, नेता के प्रति तथा समूह लक्ष्य के प्रति अध्ययन करके समूह के मनोबल का मापन किया जाता है. यदि सदस्यों की मनोवृत्ति अपने नेता, समूह के अन्य सदस्यों तथा समूह लक्ष्य के प्रति सकारात्मक होती है समूह का मनोबल ऊंचा समझा जाता है परंतु जब ऐसी मनोवृत्ति नकारात्मक होती हैं तो समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है. मनोवृति मापनी विधि के भी कुछ दोष हैं जो निम्नलिखित है-


• मनोवृति मापनी में प्रायः सदस्य वास्तविक मनोवृति की अभिव्यक्ति ना करके एक सामाजिक रूप से वंचित मनोवृति की अभिव्यक्ति करते हैं.


• मनोवृति मापने द्वारा मनोवृति का मापन उस मापने में छपे हुए कथनों को पढ़कर तथा उसके प्रति अनुक्रिया करने पर होता है . इसका स्पष्ट मतलब तब यह हुआ कि यदि सदस्य में छपे हुए प्रश्नों को पढ़कर समझने तथा करने की क्षमता नहीं है, तो उन पर मनोवृत्ति मापने का प्रयोग समूह मनोबल को मापने में नहीं किया जा सकता है.


उपर्युक्त विधियों के अलावा भी समाज मनोवैज्ञानिकों ने समूह मनोबल को मापने के लिए कुछ वस्तुनिष्ठ मानदंडों का वर्णन किया है. इन मापदंडों में समूह की उत्पादकता, सदस्यों की शिकायतें, सदस्यों की अनुपस्थिति आदि प्रमुख है यदि किसी समूह में सदस्यों की शिकायतें अधिक होती हैं, तो सदस्य समूह कार्य से प्रायः अनुपस्थित रहते हैं और समूह की उत्पादकता कम रहती है. तो समूह का मनोबल नीचे समझा जाता है. इसके विपरीत यदि समूह में सदस्यों की शिकायतें काफी कम होती है, सदस्यों की अनुपस्थिति कम होती है तथा समूह की उत्पादकता अधिक होती है, तो समझा जाता है कि समूह मनोबल ऊंचा है.


इस प्रकार स्पष्ट है कि समूह मनोबल को मापने के अनेक विधियां समाज मनोवैज्ञानिकों द्वारा प्रतिपादित की गई है।