समूह मनोबल को बढ़ाने की विधियां - Methods to boost group morale

समूह मनोबल को बढ़ाने की विधियां - Methods to boost group morale


समाज मनोवैज्ञानिकों ने ऐसी विधियों का भी प्रतिपादन किया है जिनके सहारे समूह का मनोबल यह भी कम है, तो उसे और अधिक बढ़ाया जा सकता है. समूह मनोबल ऊंचा होने से समूह के निष्पादन पर सीधा असर पड़ता है. बढ़े हुए मनोबल से समूह का निष्पादन भी अधिक बढ़ जाता है. यही कारण है कि इन विधियों की महत्ता समाज मनोवैज्ञानिकों में काफी है. कुछ ऐसी विधियां निम्नलिखित हैं


1- विशेषज्ञ विधि- समूह मनोबल ऊंचा करने की यह एक सरलतम विधि है. इस विधि में समूह में एक विशेषज्ञ बुलाया जाता है जो समूह के सदस्यों से सीधा बातचीत कर नीचा मनोबल के कारणों का पता लगाता है. इस तरह से समूह का अध्ययन विशेषज्ञ स्थान पर जाकर करता है तथा सदस्यों के साथ सीधा बातचीत करके अनुभव प्राप्त करता है. आवश्यकताअनुसार वह विशेष प्रश्नावली तथा साक्षात्कार का प्रयोग करके निम्न मनोबल के सही कारणों का पता लगाता है तथा उसे दूर करने के लिए सुझाव देता है, उसकी सलाह या सुझाव के अनुसार कार्य करके समूह का नेता समूह मनोबल को ऊंचा करने का प्रयास करता है, कभी कभी ऐसा भी होता है कि एक विशेषज्ञ का सुझाव अधिक प्रभाव कारी नहीं होने के कारण समूह के नेता दूसरे विशेषज्ञ को भी बुलाते हैं

जो फिर समूह के सदस्यों से बातचीत कर निम्न मनोबल के कारण का पता लगाने की कोशिश करते हैं.


यद्यपि समूह मनोबल को ऊंचा करने की यह एक सरलतम विधि है फिर भी इस विधि में एक प्रमुख दोष है - ऐसा देखा गया है कि विशेषज्ञ को समूह के सदस्य नेता के भय या अन्य सामाजिक परिस्थितियों के कारण सही एवं वास्तविक बात नहीं बता पाते हैं. इसका परिणाम यह होता है कि विशेषज्ञ को निम्न मनोबल के प्रमुख कारणों का पता नहीं चल पाता है. जिसके फलस्वरूप, उनके द्वारा मनोबल को ऊंचा करने के लिए दिया गया सुझाव अधिक प्रभाव कारी नहीं हो पाता है.


2- जासूस विधि - समाज मनोवैज्ञानिकों ने विशेषज्ञ विधि के उपर्युक्त दोष को दूर करने के ख्याल से समूह मनोबल के मापन के लिए एक दूसरी विधि का प्रतिपादन किया है जिसे जासूस विधि कहा जाता है, सीधी में भी किसी विशेषज्ञ का ही सहारा लिया जाता है जो समूह के सदस्यों के बीच विशेषज्ञ के रूप में नहीं बल्कि एक नए सदस्य के रूप में रहकर एवं उन लोगों से बातचीत करके निम्न मनोबल के कारणों का पता लगाता है समूह के अन्य सदस्य उसे सामान्य सदस्य समझकर स्पष्ट रूप से बातचीत करते हैं

और समूह में निम्न मनोबल के कारणों पर नहीं संकोच प्रकाश डालते हैं. इसका परिणाम यह होता है कि जासूस विशेषज्ञ को निम्न मनोबल के सही कारणों का पता चल जाता है और फिर वह समूह के नेता को मनोबल ऊंचा करने का सुझाव देकर समूह से गायब हो जाता है।


इस विधि का सबसे प्रमुख लाभ यह है कि इसके द्वारा निम्न समूह मनोबल के वास्तविक कारणों का आसानी से पता चल जाता है. फलतः विशेषज्ञ द्वारा किया गया सुझाव काफी लाभप्रद होता है. जासूस विधि के भी कुछ दोष हैं जो निम्नलिखित हैं-


• सभी सदस्यों को जासूस विशेषज्ञ पर शक हो जाता है, जिसके फलस्वरूप सदस्य या समझने लगते हैं कि यह नया सदस्य नहीं है बल्कि कोई प्रेक्षक है जो हमारे समूह की गुप्त बात को जानना चाहता है. ऐसा समझकर सदस्य अपना स्वभाविक व्यवहार बंद कर अस्वाभाविक व्यवहार करना प्रारंभ कर देते हैं जिसके परिणामस्वरूप समूह के निम्न मनोबल के वास्तविक कारणों का पता नहीं चलता है.


• जासूस विशेषज्ञ अपना कार्य समाप्त करने पर समूह से अचानक गायब हो जाता है. इससे समूह के सदस्यों की मनोवृत्ति समूह के नेता के प्रति नकारात्मक हो जाती है तथा साथ ही साथ उसमें विश्वास कम हो जाता है. इसका परिणाम यह होता है कि समूह मनोबल ऊंचा होने के बजाय और भी नीचा हो जाता है.


3- सलाहकार विधि इस विधि में समूह के निम्न मनोबल को ऊंचा करने के लिए एक सलाहकार का प्रयोग किया जाता है जो वास्तव में मानव संबंधों को समझने में एक विशेषज्ञ होता है. समूह के सदस्यों को यह कहा जाता है कि इस व्यक्ति को वास्तव में सदस्यों के कल्याण का ध्यान रखने के लिए बुलाया गया है. अतः इन्हें सदस्यों का एक अच्छा प्रतिनिधि माना जा सकता है. सदस्य अपनी समस्याओं के बारे में इस सलाहकार से खुलकर बातचीत करते हैं तथा इन के काम में सहयोग देते हैं. सदस्यगण समूह में व्याप्त संघर्ष, प्रतियोगिता की भावना, एक दूसरे के प्रति नकारात्मक मनोवृत्ति के बारे में सलाहकार को बतलाते हैं सलाहकार इन सभी समस्याओं का अध्ययन करके उसे दूर करने के तरीकों का सुझाव देता है ताकि समूह का मनोबल ऊंचा हो सके.


यह विधि उपर्युक्त दोनों विधियों से इस अर्थ में भिन्न है कि समूह के सदस्यगण को यह पता होता है कि यह एक सलाहकार है जिस का कार्य हम लोगों के कल्याण से संबंधित है. शायद यही कारण है कि सदस्यगण इस सलाहकार के कार्य में अपना पूर्ण सहयोग देते हैं।


यद्यपि यह विधि उपर्युक्त दोनों विधियों में अधिक लाभप्रद है. फिर भी इसमें एक दोष बतलाया गया है. कुछ समाज मनोवैज्ञानिकों का विचार है कि प्राय: सलाहकार कुछ विशेष कारणों से समूह में व्याप्त निम्न मनोबल के कारणों को ठीक ढंग से एवं गहन रूप से अध्ययन नहीं कर पाते हैं जिससे इस विधि की सार्थकता बहुत नहीं रह जाती है.


4 सदस्य समस्या विधि- समूह मनोबल को ऊंचा करने की यह विधि अन्य तीन विधियों से अधिक लोकप्रिय है . सचमुच में इस विधि में प्रजातंत्रात्मक ढंग से समूह के मनोबल को ऊंचा उठाने का प्रयत्न किया जाता है. इस विधि में एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक या विशेषज्ञ सदस्यगण के सामने निम्न मनोबल के कारणों से संबंधित समस्या को रखते हैं और सदस्यगण को आपस में राय मशवरा करके उस समस्या का समाधान करना होता है.

विशेषज्ञ या प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक समस्या के समाधान में अपनी ओर से कोई बाधा तो नहीं डालते हैं परंतु बीच-बीच में आवश्यकता पड़ने पर अपना निर्देशन अवश्य देते हैं. जब सदस्यगण समस्या के समाधान के बारे में एक निर्णय पर पहुंच जाते हैं तो उसमें दो तरह की भावनाओं का विकास होता है-


1 सामूहिक सहयोग भावना, समूह की क्रियाओं में सहयोग तथा 


2- आवेस्टन की भावना. इन दोनों तरह की भावनाओं का स्वाभाविक परिणाम यह होता है कि इससे समूह का मनोबल अपने आप ऊंचा हो जाता है क्योंकि समूह में एकता, एकात्मकता तथा अहम-आवेस्टन आदि की वृद्धि हो जाती है. इस विधि के कुछ ऐसे गुण हैं जो निम्नलिखित है।


इस विधि में सदस्य गण स्वयं ही समस्या के समाधान के बारे में निर्णय लेते हैं. फलस्वरूप सदस्यों में सहयोग, संयोगिता की भावना इतनी तीव्र हो जाती है कि मनोबल अपने आप ऊंचा हो जाता है. क्योंकि इस विधि में समूह के मनोबल को ऊंचा करने के लिए एक प्रजातंत्र आत्मक तरीका अपनाया जाता है. इसलिए सदस्यों की मनोवृत्ति समूह लक्ष्य एवं समूह नेतृत्व के प्रति अधिक सकारात्मक होता है जो मनोबल को ऊंचा करने में काफी सहायक होती है।


इन विशेषताओं के बावजूद भी इस विधि का एक प्रधान अवगुण यह है कि इस विधि का संचालन एक प्रशिक्षित मनोवैज्ञानिक या कुशल विशेषज्ञ ही कर सकता है. इसका मतलब यह हुआ कि ऐसे व्यक्तियों के अभाव में इस विधि का प्रयोग करना संभव नहीं है।