मध्य सीमावर्ती सिद्धांत में लघु एवं वृहद सिद्धांत - Minor and Major Theory in Middle Frontier Theory

मध्य सीमावर्ती सिद्धांत में लघु एवं वृहद सिद्धांत - Minor and Major Theory in Middle Frontier Theory


मिडिल रेंज सिद्धांत मैक्रो व माइक्रो अध्ययनों के बीच की स्थिति है। इसे निम्नलिखित रूप में आसानी से स्पष्ट किया जा सकता है।


(1) वृहत (विस्तृत) अथवा महत् सिद्धांत दृष्टि इसमें अध्ययन इकाई के रूप में एक विस्तृत समाजशास्त्रीय समस्या अथवा अध्ययन विषय का चयन किया जाता है। उदाहारण स्वरूप हम देख सकते हैं कि जब किसी वृहत व्यवस्था या वृहत समूह या वृहद समुदाय अथवा सामाजिक परिवर्तन सामाजिक संगठन व मानव-व्यवहार जैसे किसी वृहद सामाजिक घटना का अध्ययन किया जाता है और इस अध्ययन के आधार पर समाजशास्त्रीय कहते हैं और इससे निर्मित होने वाले सिद्धांतों को वृहद अथवा महत् सिद्धांत कहा जाता है। इस प्रकार के सिद्धात संपूर्ण व्यवस्था पर लागू किए जाते हैं। टालकट पारसन्स जैसे समाजशास्त्री समाजशास्त्र में सार्वलौकिक तथा महत् सिद्धांतों के निर्माण पर अत्यधिक बल देते हैं।


(2) लघु या सूक्ष्म सिद्धांत दृष्टि लघु या सूक्ष्म अध्ययनों में छोटे आकार की इकाई का चयन करके अध्ययन किया जाता है। उदाहरण के तौर पर हम देख सकते हैं कि वैयक्तिक अध्ययन-पद्धति के अंतर्गत कतिपय व्यक्ति विशेष अथवा इकाई विशेष का चयन करके उसी का सूक्ष्म व गहन अध्ययन किया जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें छोटे समुदाय का भी अध्ययन किया जाता है। रेडफील्ड द्वारा लघु समुदाय पर प्रामाणिक अध्ययन किया जाता है।


उक्त दोनों बिंदुओं से स्पष्ट है कि समाजशास्त्रीय सिद्धांतों के दो छोर हैं -


(क) वृहद या विस्तृत अध्ययन 


(ख) लघु या सूक्ष्म अध्ययन


इन दोनों के बीच की स्थिति को मिडिल रेंज के अध्ययन तथा इसके आधार पर निर्मित होने वाले सिद्धांत को मिडिल रेंज थियरी (मध्य अभिसीमा सिद्धांत) कहते हैं।