आधुनिक समाज - modern society

आधुनिक समाज - modern society


पारसन्स के अनुसार समाजों के विकास की प्रक्रिया का तीसरा चरण है आधुनिक सामाजिक प्रणलियाँ। इस प्रकार के समाजों का उदय विकास के मध्यवर्ती चरण, जिसे समाजों का पूर्व-औद्योगिक चर भी कहा जा सकता है( से अनेक प्रकार की सामाजिक संस्थाओं के विकास के माध्यम से हुआ। इस प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी ने निश्चय ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, किंतु यह विकास पश्चिमी यूरोपीय समाज में हुई तीन प्रकार की क्रांतियों के कारण संभव हुआ। पारसन्स के अनुसार, ये क्रांतियाँ मानवता के लिए पश्चिम की विशिष्ट देन है। यही कारण है कि पारसन्स का यह विचार भी है कि समाज के आधुनिक चरण का विकास पूर्णतया पश्चिम के योगदान का परिणाम है और इस दिशा में पूर्व अर्थात् चीन या भारत जैसी किसी भी अन्य सभ्यता ने भूमिका नहीं निभाई।


उत्पादन की कारखाना प्रणाली से शहरी और औद्योगिक विकास में योगदान मिला और समाज के आर्थिक एवं सामाजिक विकास में विज्ञान तथा प्रौद्योगिक की बढ़ती हुई भूमिका विकास का स्थाई तत्व बन गई।

यह क्रांति यूरोप में लोकतांत्रिक क्रांति का विशेष योगदान रहा, जिसमें समानता. विश्व बंधुत्व, स्वतंत्रता जैसे मूल्यों की स्थापना की और राजशाही की जड़े खोदकर उसके स्थान पर निर्वाचित सरकार की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सूत्रपात किया। इंग्लैंड में भी सुधार आंदोलन तथा राजनीतिक आंदोलन द्वारा राजा की निरंकुश सत्ता छिन गई और शासन के अधिकार निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के हाथों में चले गए। लोकतांत्रिक आंदोलन का एक क्रांतिकारी परिणाम नई सामाजिक प्रणाली के उदय के रूप में हुआ, जिनके अंतर्गत जन्म नहीं, बल्कि व्यक्ति की योग्यता समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा का आधार बन गई। औद्योगिक तथा लोकतांत्रिक क्रांतियों ने मिलकर सामाजिक परिवर्तन की गई प्रक्रिया की नींव डाली. जिससे अवसरों की उपलब्धता के विषय में लोगों को अधिक भागीदारी तथा समानता मिलने लगी, किंतु यह सभी कुछ तीसरी क्रांतिकारी घटना के कारण संभव हुआ और वह है यूरोपीय समाज में शैक्षिक क्रांति।