अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता - motivational orientation

अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता - motivational orientation


अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता के तीन क्षेत्र है। ये है- बोधपरक भावप्रवण और मूल्यांकन परक उन्मुखता


• बोधपरक उन्मुखता पात्रों (व्यक्तियों) को अपने वातावरण को या वस्तु को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार मानसिक वस्तु के रूप में देखने में सहायता करता है। वे (यानी पात्र) अपने प्रेक्षण की विषय-वस्तु की वस्तुनिष्ठता को समझने का प्रयास करते हैं। 


• भावप्रवण उन्मुखता में पात्रों की अपनी विषय-वस्तु के प्रति भावप्रवण अभिवृत्ति शामिल होती है।


. मूल्यांकनपरक उन्मुखता पात्रों को सर्वाधिक सक्षमता से अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अपने प्रयासों को संगठित करने में मदद करता है। इस विषय में एक गृहिणी के व्यवहार का उदाहरण लीजिए जो बाजार में सब्जी खरीदने जाती है। बोधपरक उन्मुखता से उसे अपनी आवश्यकताओं के अनुसार सब्जियों की गुवणत्ता को समझने में मदद मिलती है, और फिर उनकी कीमतों के संदर्भ में आवश्यकता को समझने में मदद मिलती है। भावप्रवण उन्मुखता से वह यह निर्धारित करती है कि वह किस सब्जी के अधिक पसंद करती है। और उसके बाद मूल्यांकनपरक उन्मुखता से उसके लिए य संभव होता है कि वह ऐसी सब्जी का चयन करे जिससे उसे सबसे अधिक संतोष प्राप्त हों।