अभिजनों का परिभ्रमण एवं चक्रीय सामाजिक परिवर्तन - Movement of elites and cyclical social change

अभिजनों का परिभ्रमण एवं चक्रीय सामाजिक परिवर्तन - Movement of elites and cyclical social change


पैरोटो के अनुसार प्रत्येक सामाजिक संरचना में जो ऊँच-नीच का संस्तरण होता है, वह मोटे तौर पर दो वर्गों द्वारा होता है- उच्च वर्ग व निम्न वर्ग इनमें से कोई भी वर्ग स्थिर नहीं होता, अपितु इनमें “चक्रीय गति" पाई जाती है। चक्रिय गति इस अर्थ में समाज के इन दो वर्गों में निरन्तर ऊपर से नीचे या अधोगामी और नीचे से ऊपर या ऊर्ध्वगामी प्रवाह होता रहता है। और भी स्पष्ट रूप से चक्रिय गति को इस प्रकार समझा जा सकता हैकि जो वर्ग सामाजिक संरचना में ऊपरी भाग में होते हैं. वह कालान्तर में भ्रष्ट हो जाने के कारण अपने पद और प्रतिष्ठा से गिर जाते हैं अर्थात् अभिजात वर्ग अपने गुणों को खोकर या असफल होकर निम्न वर्ग में आ जाते हैं। दूसरी ओर उन खाली जगहों को भरने के लिए निम्न वर्ग में जो बुद्धिमान, कुशल, चरित्रवान तथा योग्य होते हैं, वे नीचे से ऊपर की ओर जाते रहते हैं।


इस प्रकार उच्च वर्ग का निम्न वर्ग में आने या उसका विनाश होने और निम्न वर्ग का उच्च वर्ग में जाने की प्रक्रिया चक्रिय ढंग से चलती रहती है। इसी चक्रिय गति के कारण सामाजिक ढाँचा परिवर्तित हो जाता है या सामाजिक परिवर्तन होता है। इसलिए इसे चक्रिय गति का सिद्धांत" या "सामाजिक परिवर्तन या चक्रिय सिद्धांत" कहा जाता है।


सामाजिक परिवर्तन के चक्र के तीन मुख्य पक्ष है- राजनीतिक, आर्थिक व आदर्शात्मक। राजनीतिक क्षेत्र में विभिन्न अभिजन वर्ग के बीच परिभ्रमण या चक्रीय परिवर्तन तब आरम्भ होता है जब “सामूहिकता के स्थायित्व के विशिष्ट चालकों" का प्रभाव शासकीय अभिजन वर्ग से कम होने लगता है तथा इनके स्थान पर व्यवहार संयोजन के विशिष्ट चालकों द्वारा अधिक प्रभावित होने लगता है। दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि प्रारम्भिक अवस्था में जो राजनीतिक अभिजन (Political Eliete) “समूह के स्थायित्व के विशिष्ट चालको द्वारा संचालित होकर शक्ति द्वारा सामाजिक व्यवस्था को स्थायी बनाते हैं शक्तिशाली होने के कारण ये "शेर" कहलाते हैं। इनका अपने कुछ आदर्शवादी लक्ष्यों व सिद्धान्तों पर दृढ विश्वास होता है। इन आदर्शों की प्राप्ति के लिए शक्ति का भी प्रयोग करते हैं। परन्तु अधिक शक्ति प्रयोग की प्रतिक्रिया भयंकर हो सकती है। जो असुविधाजनक तरीका है अतः ये कूटनीति का सहारा लेते हैं। धीरे-धीरे ये चालकी (संयोजन के विशिष्ट चालक) के द्वारा शासन कार्य आरम्भ कर देते हैं। इस प्रकार शासक वर्ग "शेर" के गुण को छोड़कर "लोमड़ियों" वाला गुण अपना लेते हैं अर्थात् ये खुद को (शेर) की जगह (लोमड़ी) में परिवर्तित कर लेते हैं।

शासक वर्ग में जैसे-जैसे चालाकी और छलकपट बढ़ता है वैसे-वैसे निम्न वर्ग की लोमड़िया जो सत्ता व शासन के लिए तत्पर रहती है, खुद को (शेर) में परिवर्तित कर लेती हैं। अन्त में एक समय आता है जब निम्न वर्ग के (शेर) उच्च वर्ग के (लोमड़ियों) पर आधिपत्य कर लेते हैं और सत्ता में निम्न वर्ग के लोगों का वर्चस्व हो जाता है। इस प्रकार शेर व लोमड़ियों के मध्य परिभ्रमण चलता रहता है। इस प्रकार राजनीतिक क्षेत्र या राजनीतिक संगठन में परिवर्तन होता है। उदाहरण- पैरेटो ने यूरोप के समाज का उदाहरण देते हुए बतलाया कि आज यहाँ सत्ता पर जिस वर्ग का प्रभुत्व है उनकी प्रकृति लोमड़ी जैसी है। शासन में आज जिन भ्रष्ट राजनीतिक अभिजनों तथा चरित्रहीन वकीलों की बहुलता है, वे अपनी को छल कपट से बनाये हुए हैं तथा उनमें धीरे-धीरे शक्ति के उपयोग की क्षमता कम होती जा रही है अर्थात् इनमें (सयोजन के विशिष्ट चालक) की मात्रा बढ़ रही है। ठीक इसके विपरीत निम्न वर्ग में एक ऐसे अभिजन वर्ग का उदय हो रहा है। जिनके व्यवहार समूह के स्थायित्व के विशिष्ट चालकों से प्रभावित हैं तथा जो शक्ति के उपयोग के द्वारा सामाजिक व्यवस्था को सन्तुलन और स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। स्पष्ट है कि यह नया अभिजन वर्ग लोमड़ियों को समाप्त करके उनका स्थान स्वयं ले लेगा।


आर्थिक क्षेत्र में परिभ्रमण को स्पष्ट करते हुये पैरेटो ने लिखा है

कि जिस प्रकार राजनीतिक क्षेत्रों में परिवर्तन का चक्र लोमड़ियों और शेरों के बीच चलता है उसी तरह आर्थिक क्षेत्र में यह चक्र सट्टेदारों (Speculatorn) तथा पूँजी भोगी वर्ग (Rentiers) के बीच चलता है। इनके अनुसार प्रत्येक समाज दो आर्थिक वर्ग (सट्टेदार एवं पूजी भोगी या निश्चित आय वाला वर्ग) होते हैं।


सट्टेदार वर्ग वह है जिसमें सयोजन के विशिष्ट चालक की प्रधानता होती है। इसमें अविष्कारकर्ता. उद्योगपति, नेता आदि होते हैं। यह वर्ग अवसरों और सम्भावनाओं से लाभ उठाने का प्रयत्न करता है तथा इसकी प्रवृत्ति अपने लिए अधिक लाभ प्राप्त करने की होती है। दूसरा वर्ग पूँजीभोगी वर्ग या निश्चित आय वाला वर्ग है जिसमें स्थायित्व के विशिष्ट चालाकों का प्रभुत्व है। इसमें आय लगभग निश्चित होती है यह सट्टेबाजों की तरह अनुमान पर निर्भर नहीं है। परिभ्रमण की प्रक्रिया में यह होता है कि सट्टेदार वर्ग, जिसमें संयोजन के विशिष्ट चालकों की प्रभुता के कारण, यह अपने हित या अन्य प्रकार की शक्ति के मोह से चालाकी और भ्रष्टाचार का स्वयं शिकार हो जाता है। जिसके कारण उसका पतन होता है और दूसरा वर्ग उसका स्थान ले लेता है।


इस संदर्भ में पैरेटो ने बताया कि जब शासकीय अभिजन वर्ग कुछ समय तक सत्ता में रह लेता है तब उसकी प्रवृत्ति सट्टेदारों की हो जाती है। और वह अधिक से अधिक लाभ प्राप्त करने की लालसा में दुर्गुणों का शिकार होता है जो इसके पतन का कारण होता है। आदर्शात्मक क्षेत्र में भी यही चक्र विश्वास व अविश्वास के रूप में चलता रहता है। एक समय में विश्वासवादियों (जिसमें संयोजन के विशिष्ट चालकों का प्रभुत्व होता है।) का प्रभुत्व रहता हैं परन्तु अपनी

दृढ़ता या रूढ़िवादिता के कारण वे अपने पतन का साधन अपने आप ही जुटा लेते हैं। और उनका स्थान

दूसरे वर्ग के लोग ले लेते हैं।