मुस्लिम विवाहः उद्देश्य एवं शर्ते - Muslim Marriage Aim and conditions
मुस्लिम विवाहः उद्देश्य एवं शर्ते - Muslim Marriage Aim and conditions
मुस्लिम विवाह के उद्देश्य:
1. स्त्री-पुरुष को यौन संबंध स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान करना ।
2. बच्चों को जन्म देना तथा उनका पालन-पोषण करना।
3. पति-पत्नी के पारस्परिक अधिकारों को "मेहर" के द्वारा स्वीकृति प्रदान करना।
4. एक संविदा के रूप में पति-पत्नी को यह अधिकार देना कि एक पक्ष द्वारा संविदा का पालन न करने पर दूसरा पक्ष उसे छोड़ सकता है।
मुस्लिम विवाह की शर्तें
मुस्लिम विवाह की शर्तों के अंतर्गत उन परिस्थितियों की काफी जानकारी होगी जो मुस्लिम विवाह के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
इनकी अनुपस्थिति में विवाह मान्य नहीं होगा। अतः इसे "विवाह के निषेध" के रूप में भी समझ सकते हैं। मुस्लिम विवाह की निम्नलिखित शर्तें इस प्रकार हैं-
1. प्रत्येक मुसलमान, जो बालिंग ( 15 वर्ष की अवस्था का) हो चुका हो तथा जो पागल न हो अर्थात् सही दिमागी संतुलन का हो, निकाह के लिए समझौता कर सकता है। पागल तथा नाबालिग बच्चों के निकाह के लिए उनके संरक्षकों (वली) की स्वीकृति आवश्यक है। विवाह के समय यदि लड़के-लड़की में कोई नाबालिग हो तो उसे बालिग या वयस्क होने पर विवाह संबंध समाप्त करने का अधिकार रहता है। इसे खैरुल बालिग (Option of Puberty) कहते हैं। लेकिन साधारणतः पिता या दादा द्वारा किए गए विवाह मुसलमानों में परंपरागत नियमों के अनुसार इस आधार पर समाप्त नहीं किए जाते।
2. विवाह की स्वीकृति दोनों पक्षों की स्वतंत्र इच्छा से होनी चाहिए न की धोखे या जबरदस्ती से।
3. विवाह को स्वीकृति मिलने के अवसर पर दो पुरुष गवाहों अथवा एक पुरुष और दो स्त्री गवाहों का होना आवश्यक है।
4. विवाह के लिए लड़के-लड़की की स्वीकृति काजी' के सम्मुख होनी चाहिए।
5. मुस्लिम समाज में एक स्त्री एक ही पुरुष से विवाह कर सकती है परंतु एक पुरुष एक साथ चार स्त्रियों से विवाह कर सकता है। स्त्री पहले पति से तलाक लेने या उसकी मृत्यु के बाद दूसरा विवाह कर सकती है।
6. मुस्लिम स्त्री केवल मुस्लिम पुरुष के साथ ही विवाह कर सकती है, परंतु मुस्लिम पुरुष कितबिया स्त्री से भी विवाह कर सकता है। जो धर्म किसी किताब पर आधारित है उसके अनुयायियों को कितबिया कहते हैं, जैसे इसाई धर्म मुस्लिम पुरुष को अग्नि-पूजक स्त्री के साथ सामान्य विवाह की आज्ञा नहीं दी गयी है। वह ऐसी स्त्री के साथ अस्थायी विवाह कर सकता है जिसे मुताह र के नाम से पुकारते हैं।
7. विवाह की शर्त के रूप में यह आवश्यक है कि “मेहर" की राशि चुका दी गयी हो या इसको निश्चित कर लिया गया हो।
8. विवाह के समय लड़के-लड़की का सामान्य स्थिति में होना आवश्यक है अर्थात् वे मादक द्रव्य जैसे शराब आदि के नशे में न हो।
9. जो स्त्री इद्दत की अवधि (चार मासिक धर्मों के बीच तीन महीने की अवधि में हो, उसके साथ विवाह को अनियमित माना गया है।
10. अति निकट संबंधियों में विवाह वर्जित है अर्थात् निषिद्ध संबंधों की श्रेणी में आने वाले लोगों का आपस में वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हो सकता उदाहरण के रूप में मुस्लिम लोगों में कोई भी माता, दादी, पुत्री, दोहती. सगी बहनें, चाची, मौसी तथा भाई-बहन की लड़कियों से विवाह नहीं कर सकता परंतु भाईयों की संताने आपस में विवाह कर सकते हैं।
11. मुस्लिम लोगों में तीर्थयात्रा के समय में वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं किए जा सकते। यदि किन्ही परिस्थितियों में गर्भवती स्त्री को तलाक दे दिया गया हो तो वह स्त्री तब तक अन्य किसी से पुनर्विवाह नहीं कर सकती जब तक कि बच्चे का जन्म न हो जाए।
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