नागा जनजाति - Naga tribe

नागा जनजाति - Naga tribe


नागा टर्म स्थानीय शब्द नॉक, नॉका एवं नाग से संबंधित है, नागा भाषाओं (कोन्याक, एंओ एवं ) अन्य) के अनुसार इन शब्दों का तात्पर्य है- लोक व्यक्ति या लोकजन है।


असमी साहित्य में भी नागा शब्द पर भी पर्याप्त वर्णन मिलता है, असमी आज भी इन्हें नागा कहते हैं। जो संस्कृत शब्द लोको से संबंधित है। ज्यादातर साहित्य नागा को नोक अथवा जनसमुदाय से संबंधित मानते हैं। कुछ तिब्बत-वरमन भाषाओं जैसे गारो में नोक एक मूल शब्द है और इससे कई महत्वपूर्ण शब्द नोकतार, नोकवा, वानोक इत्यादि बने हैं ये शब्द प्रायः अरुणाचल प्रदेश के तिरपा जिले में नागाओं के लिए प्रयुक्त होते हैं।


हिंदी एवं बंगला में नागा का तात्पर्य वस्त्रहीन अथवा आवरणरहित है, जिसका तात्पर्य मौलिकता से है। वास्तव में नागा शब्द नागालैण्ड में निवासरत बहुत से जनजातीय समुदायों के एक समूह के लिए प्रयुक्त होता है। अर्थात नागा एक जनजाति नहीं वरन बहुत से समुदायों का समूह है।


ये समुदाय मानते हैं कि ये पहाड़ों की अलग-अलग दिशाओं से आकर अपने वर्तमान निवास अर्थात नागालैण्ड में रहने लगे। ये मानते है कि चीन एवं शरत के बीच व्यापारियों द्वारा उपयोग में लाई जाने वाली उपरी वर्मा एवं असम के बीच के रास्तों से इनके पूर्वज नागालैण्ड आए हैं।


उत्तर-पूर्व के चार राज्यों- असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैण्ड एवं मणिपुर में नागा समुदाय निवास करते हैं, प्रजातीय आधार पर ये मंगोलाइड प्रजाति के अंतर्गत आते हैं, नागा समुदायों द्वारा बोली जाने वाली “नागा बोली” तिब्बत-वर्मन भाषा परिवार की बोली है।


असम में तीन नागा जनजातिया जेंम, काबोई एवं सेमा निवासरत है, जेम उत्तरी कछार हिल, काबोई कछार जिले में एवं सेमा डिबरूगढ़ में निवास करते है।


मणिपुर में सात प्रमुख नागा समुदाय निवास करते हैं ये समुदाय इस प्रकार हैं- तंगखुल, कावोई एवं पुमेई, माओ, काँचा, अनाल, मराम एवं मोसांग।


नागालैण्ड में सबसे अधिक 16 नागा जनजातिया निवास करती हैं। इनके नाम निम्न प्रकार हैं आओ, अंगामी, चाखेसंग, चेंग, चिर, खेननन्गन, कोन्याक, लोथा, मकवार, फूम, रेंगमा, संगटाय, सेमा, टेखिर, यिंमचूंगरे एवं जेलियांग ।


राजनैतिक एवं प्रशासनिक क्षेत्रों के आधार पर नागालैण्ड के जिमोई एवं लिंगयमाई जेमी के नाम से जाने जाते हैं तथा मणिपुर के रोंगमई के नाम से जाने जाते हैं, मणिपुर के ही जेमई एवं लिंगमई को काचा नागा कहा जाता है जबकि असम में इन्हें ही कवोई कहा जाता है। यहा रोगमई एवं जेमई के स्थान पर जेन कहा जाता है।


“जेलियांगवेंग” तीन नागा जनजातियों का संक्षिप्ती शब्द है। ये जनजातियां हैं जेमई, निंगमोई एवं रोमेई। ये तीनों समुदाय अपनी उत्पत्ति एक समान पूर्वजों से मानते हैं।


जेलिंयाग रोम की अवधारणा 1930 में अस्तित्व में आई तब से स्वतंत्रता प्राप्ति तक तीन समुदाय के लोग नागालैण्ड, मणिपुर एवं असम में तीन जेलियांग रोम क्षेत्रों के निर्माण की मांग करते रहे हैं।

नागा समुदायों में वन एवं भूमि इनकी अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार है। स्थानांतरित कृषि एवं सीड़ीदार खेतों में कृषि इनकी कृषि के प्रमुख स्वरूप है। धान इनकी मुख्य फसल है, इसके अतिरिक्त आलू, मक्का, गेहूं, तिलहन, मिर्च, गन्ना, अनानाष, संतरा, पपीता, अमरूद इत्यादि की भी फसल होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के नागा आखेट एवं वनों से कुछ वस्तुएं जैसे शहद, जंगली फल, जंगली सब्जिया एवं ईधन इत्यादि एकत्रित करने का काम करते हैं। नागा जनजातिया पितृवंशीय समुदाय है, सभी नागा जनजातियों में इनकी परंपरागत ग्राम परिषद द्वारा सामाजिक नियंत्रण की व्यवस्था की जाती है। प्रत्येक नागा समुदाय इन समुदायों की महिलाओं द्वारा बुने जाने वाले विशिष्ट शाल के लिए भी जाना जाता है। जो अब व्यवसायिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है नागा कुशल कारीगर हैं, जो रंगीन वस्तुओं आभूषणों एवं आवासों का निर्माण करते हैं। लकड़ी में कारीगर टेटू बनाने एवं वांस तथा केन के बास्किट बनाने में ये लोग कुशल हैं। इन समुदायों में अविवाहित युवक एवं युवतियों के लिए युवागृह का महत्वपूर्ण स्थान है। यद्यपि अधिकांश नागा समुदाय अपने परंपरागत


जनजातीय धर्म के अनुयायी हैं, परंतु कुछ लोगों ने क्रिष्चियन, वैष्णव, हैराका धर्म अपनाए हैं। नागालैंड में पाई जाने वाली नागा जनजातिया अनेक समूहों में विभक्त है। इनमें कोन्याक तथा अंगामी नागा प्रमुख है। अधिकांश नागा समूह आपसी लड़ाईयों में उलझे रहते हैं। फिर भी इनके राजनैतिक संगठन बने हुए है। सामान्यतः आदिम राजनीति का अर्थ समूह पर सीमित सत्ता से लिया जाता है। आदिम राजनीति मनुष्य के व्यवहारों का व्यवस्थापन है। यह नागालैंड की जनजातियों के अलग-अलग खण्डों में लगभग सभी प्रकार के राजनीतिक संगठन पाए जाते हैं। नागा खेल अथवा टेकू के द्वारा संचालित होते हैं। खेल या टेकू वे समूह है। जो बर्हिविवाही होते हैं, अर्थात एक बड़ा वंश या कुल जिसका एक पूर्वज होता है। यह किसी बुर्जुग के नियंत्रण में रहकर कार्य करते हैं।