नेतृत्व की प्रकृति , नेतृत्व की विशेषताएं - Nature of Leadership, Characteristics of Leadership
नेतृत्व की प्रकृति , नेतृत्व की विशेषताएं - Nature of Leadership, Characteristics of Leadership
उद्योग में कर्मचारी के कार्य की देखभाल हेतु सुपरवाईजर या निरीक्षक होते है, ये निरीक्षक ही नेता कहलाते हैं। निरीक्षकों की विशेषताएं और सौम्य व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि कारखाने की नीतियां किस तरह की हैं। इन नीतियों का निर्माण प्रबंधकगण द्वारा किया जाता है। नीतियां इस प्रकार की होनी चाहिए जिससे कर्मचारियों में विश्वास की भावना जागे। इन नीतियों को कार्य रूप देने वाला निरीक्षक होता है इसलिए यह आवश्यक है कि कारखाने में निरीक्षकों के चुनाव में उनकी ईमानदारी, सहानुभूति, कार्य के प्रति लगन तथा सभी अच्छे गुणों को महत्व दिया जाए। योग्य निरीक्षक ही कर्मचारियों और कार्य के बीच संतुलन स्थापित कर सकता है। व्यवहारकुशल और सहनशील निरीक्षक कर्मचारियों पर विशिष्ठ छाप छोड़ते हैं। वे इच्छानुसार कर्मचारियों से कार्य करवाने में सफल होते हैं। यह आवश्यक नहीं है कि निरीक्षक अधिक बुद्धिमान हो लेकिन यह आवश्यक है कि निरीक्षक को व्यवहारकुशल होना चाहिए. निरीक्षक को प्रशिक्षित होना चाहिए।
नेतृत्व की विशेषताएं
नेतृत्व की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-
(i) अनुयायियों को एकत्रित करनाः
नेतृत्व का अनिवार्य लक्षण है उसके अनुयायी जो उसके प्रति निष्ठावान हों और उसके आदेशों के कार्य करें। बिना अनुयायियों के कोई नेता हो ही नहीं सकता।
(ii) सामूहिक उद्देश्य:
नेतृत्व का लक्षण यह भी हैं कि वह अपने अनुयायियों को एक सामूहिक लक्ष्य की तरफ निर्देशित करें। नेता और अनुयायियों के सामान्य उद्देश्य होते है, अन्यथा अलग अलग उद्देश्य होने पर वहां नेतृत्व अनुपस्थित होगा।
(iii) अनुयायियों को प्रभावित करना:
नेतृत्व का अनिवार्य लक्षण है कि वह अपनी इच्छानुसार अनुयायियों के व्यवहार को परिवर्तित कर सके।
(iv) प्राधिकार या शक्ति:
लोक प्रशासन में नेता के पास अधिकार होते हैं, जिनके द्वारा वह अधीनस्थों का नेतृत्व करता है। निजी संगठनों में भी नेतृत्व की शक्ति नेता को प्रबन्ध मण्डल से ही मिलती है। समाज में जो नेता दिखाई देते हैं उनके पास व्यक्तित्व की शक्ति होती है, यह शक्ति ही नेतृत्व को स्थापित करती है।
(v) नेता-अनुयायी सम्बन्धः
मेक्ग्रेगर और फालेट जैसे व्यवहारवादी विचारक मानते हैं कि नेतृत्व की प्रमुख विशेषता नेता-अनुयायी सम्बन्धों में निहित है। नेतृत्व वही होता है, अनुयायी जिसके लक्ष्यों के साथ अपने को एकीकृत कर लेते हैं। वस्तुतः परम्परावादी विचारक नेतृत्व की उन विशेषताओं पर अधिक बल देते है जिनके द्वारा नेता अधीनस्थों को प्रभावित करने में सफल होता है। इसके विपरीत व्यवहारवादी अनुयायियों की स्वीकृति पर नेतृत्व का अस्तित्व और उसकी सफलता मानते है।
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