शैक्षिक समाजशास्त्र की आवश्यकता - Need for Educational Sociology
शैक्षिक समाजशास्त्र की आवश्यकता - Need for Educational Sociology
शिक्षा का कार्य बालक के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है। बालक के विकास पर उसके परिवार, विद्यालय, समुदाय, संस्कृति आदि का प्रभाव पड़ता है। शैक्षिक समाजशास्त्र इन सभी का अध्ययन करता है। शैक्षिक समाजशास्त्र की आवश्यकता एवं महत्व निम्नानुसार हैं -
• शैक्षिक समाजशास्त्र से शिक्षा की अवधारणा को समझने में सहायता मिलती है।
• शैक्षिक समाजशास्त्र से समाज के विभिन्न रूपों का शिक्षा पर प्रभाव ज्ञान प्राप्त होता है।
• समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा के उद्देश्यों को निर्धारित करने में सहायता मिलती है।
• शैक्षिक समाजशास्त्र की सहायता से विद्यालयों के स्वरूप व उनके कार्यों का ज्ञान प्राप्त होता है।
• शिक्षा की प्रक्रिया में शिक्षक के महत्व एवं योगदान को समझने के लिए शैक्षिक समाजशास्त्र का अध्ययन आवश्यक है।
• शैक्षिक समाजशास्त्र में पिछड़े, समस्या मूलक, अपराधी बालकों की समस्याओं एवं उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि का अध्ययन किया जाता है।
• शैक्षिक समाजशास्त्र से शिक्षा की अन्य समस्याओं का हल खोजने में सहायता मिलती है।
• शैक्षिक समाजशास्त्र अनुशासन हीनता को अपराध की पृष्ठभूमि में न देखकर सामाजिक वातावरण की पृष्ठभूमि में देखता है।
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