स्त्री शिक्षा की आवश्यकता - need for female education
स्त्री शिक्षा की आवश्यकता - need for female education
भारत में स्त्री की स्थिति जहाँ एक ओर पूज्यनीय है वही दूसरी ओर उसे अबला की संज्ञा दी जाती है किसी भी देश की लगभग आधी आधी महिलाओं की होती है और यदि इस आधी आबादी को निरक्षर अशिक्षित छोड़ दिया जाये तो उस देश की प्रगति क्या सम्भव है। एक स्त्री के शिक्षित होने से पूरा परिवार में अच्छे गुणों का विकास होता है, क्योंकि किसी बच्चे का पहला गुरू उसकी माँ होती है और यदि वही शिक्षित नहीं है तो वह अपने बच्चों को क्या सिखायेगी। परिवार में घर में बच्चे पिता से ज्यादा माता के पास रहते है तो माँ का असर उनके ऊपर ज्यादा पढ़ता है इसलिए स्त्री का शिक्षत होना पुरुष के शिक्षित होने से ज्यादा आवश्यक है।
स्त्री एवं पुरुष परिवार रूपी रथ के दो पहिये है. ऐसा हम मानते है फिर एक पहिया यदि कमजोर है तो परिवार का रथ कैसे चलेगा इसलिए महिलाओं को पुरुषों के समान शिक्षा देने की आवश्यकता विश्व के इतिहास में स्त्री शिक्षा के महत्व को सभी ने स्वीकार किया है मानव संसाधनों के समुचि विकास, परिवार का विकास, बच्चों का चरित्र निर्माण जनतंत्र को सफलता देश की बहुमुखी प्रगति के लिए पुरुषों की शिक्षा की अपेक्षा स्त्री शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। प्रसिद्ध सेना नायक नैयोलियन का कहना था कि मुझे सुशिक्षित माताएं दो मैं एक सुशिक्षित राष्ट्र का निर्माण कर दूँगा। विभिन्न क्षेत्रों में स्त्री शिक्षा का महत्व निम्नानुसार है -
परिवार की दृष्टि से - सम्पूर्ण परिवार की उन्नति के लिए माँ का शिक्षित होना सबसे जरूरी है। शिक्षित माँ बालक के व्यक्तित्व का चहुमुखी विकास करती है। इस सन्दर्भ में विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग के विचार थे- “शिक्षित स्त्री के बिना शिक्षित पुरुष हो ही नहीं सकता शिक्षित स्त्री शिक्षा को दूसरी पीढ़ी तक स्वत: ही पहुँचा देती है।
स्त्री शिक्षा पर पं नेहरू के विचार थे लड़के की शिक्ष एक व्यक्ति की शिक्षा है, किन्तु एक लड़की की शिक्षा सम्पूर्ण परिवार की शिक्षा है। हमारे धर्म ग्रन्थों में भी लिखा है कि "जहाँ नारियों का सम्मान होता है वहीं देवताओं का वास होता है अर्थात स्त्री पूरे परिवार की धुरी के समान होती है। महाभारत में भी माता का सबसे अच्छा गुरु माना गया है। नारी के मुख्य गुण है करणा स्नेह उदरता। इसलिए नारी का शिक्षित होना पूरे परिवार के विकास के लिए उपयोगी है।
सामाजिक दृष्टि से - समाज के चहुमुखी विकास स्त्री शिक्षा का बहुत महत्व है। बालक को नागरिकता का पाठ सर्वप्रथम माँ से ही प्राप्त होता है माँ से ही उचित संस्कार ग्रहण कर वह समाज में प्रवेश करता है तथा समाज के विकास में सहयोग देता है। दूसरे शब्दों में नारी समाज की शक्ति होती है यदि नारी शिक्षित होगी तो समाज में सुसंस्कृत बालक जायेंगे जिससे समाज की संस्कृत होगा।
इसलिए नारी की शिक्षा समाज की दृष्टि से भी महत्व रखती है।
राजनैतिक दृष्टि - राष्ट्र के उत्थान में शिक्षित स्त्री की भूमिका सदैव देखी जाती हैं। जनतंत्र - की सफलता में भी स्त्री श्रेय दिया जाता है। स्त्री शिक्षा एक ऐसा अस्त्र है जिसके द्वारा किसी देश की प्रगति देखी जा सकती है। कई क्षेत्रों में स्त्री पुरुषों से भी आगे निकल गई है। महर्षि कर्वे का कहना है कि राष्ट्र के उत्कर्ष के लिए तमाम नारियाँ शिक्षित होनी चाहिए" राष्ट्र की प्रत्येक प्रकार की समस्याओं के निदान में उनकी भूमिका तभी सार्थक होगी जब कि वे ज्ञान वान, हो शिक्षित है।
आर्थिक दृष्टि से - नारी प्रत्येक परिस्थितियों में परिवार की मदद करती है। स्त्री ने निम्न वर्ग के परिवार में पुरुषों के साथ मिलकर कन्धे से कन्धा मिलाकर धनोपार्जन करके परिवार को आर्थिक सहयोग दिया। मध्यम एवं उच्च वर्ग की महिलायें भी परिवार में नौकरी के माध्यम से आर्थिक सहयोग कर रही है। आज शिक्षित महिला अकेले रह कर अपना खर्च चला रही है किसी पर आश्रित नहीं है इसलिए स्त्री का शिक्षित होना जरूरी है आज के माता पिता अच्छी शादी से पहले उसे अच्छा पढ़ाना ज्यादा हितकारी समझते है।
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