प्रकार्यात्मक विश्लेषण की अध्ययन-वस्तु - object of functional analysis
प्रकार्यात्मक विश्लेषण की अध्ययन-वस्तु - object of functional analysis
मर्टन के अनुसार सामाजिक तथ्यों के प्रकार्यात्मक विश्लेशण के लिए निम्नलिखित अध्ययन वस्तुओं पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
(1) सामाजिक संरचना में भाग लेने वाले व्यक्तियों की स्थिति (Location of Statuses of Participants in the Social Structure)
प्रकार्यात्मक विश्लेषण में सामाजिक संरचना में भाग लेने वाले व्यक्तियों की स्थितियों उनसे संबंधित भूमिकाओं समूह के साथ संबंधों के प्रति पारस्परिक संबंधों आदि का प्रकार्यात्मक वर्णन किया जाना चाहिए।
(2) व्यावहारिक के वैकल्पिक प्रतिमान (Alternative Modes of Behaviour)
प्रकार्यात्मक विश्लेषण में जिस समस्या का अध्ययन करना है उसका वर्णन तो करना ही चाहिए, पर यह विश्लेषण के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए अन्य व्यवहार के वैकल्पिक प्रतिमानों, जो कि उस प्रकार्य को कर सकते हैं, का भी वर्णन करना आवश्यक है। उदाहरण के लिए, भारत में हिंदू विवाह का अध्ययन करते समय विवाह संस्कार ( परंपरात्मत विवहा) का ही वर्णन पर्याप्त नहीं है, अपितु हिंदू के लिए अन्य विवाह के वैकल्पिक प्रतिमानों जैसे सिविल मैरिज, प्रेम विवाह, कोर्ट मैरिज, आदि का भी वर्णन आवश्यक है।
( 3 ) प्रतिमान के प्रति दृष्टिकोण का वर्णन (Description of the Attitude Towards the Pattern)
प्रतिमान, जोकि प्रचलित है. के प्रति समाज के सदस्यों का दृष्टिकोण का भी वर्णन करना चाहिए। इससे प्रतिमान का भावात्मक और ज्ञानात्मक अर्थों का ज्ञान स्पष्ट होता है।
(4) प्रतिमान को अपनाने में सहायक प्रेरणाएँ (Motivations for Participating in the Pattern)
कोई प्रतिमान क्यों स्वीकार किया जाता है या क्यों अस्वीकार किया जाता है, इसके पीछे कुछ न कुछ कारण होते हैं इन कारणों के पीछे जो प्रेरणाएँ होती हैं, उनका वर्णन एवं खोज प्रकार्यात्मक विश्लेषण के लिए आवश्यक है। ये प्रेरणाएँ व्यक्तियों के मनोवैज्ञानिक प्रकार्यों से संबंधित होती है।
(5) व्यवहार की संलग्न अमान्यता प्राप्त अभिव्यक्तियाँ Associated Unrecognised Regularities of Behaviour)
कुछ ऐसे बार-बार होने वाले नियमित व्यवहार होते हैं जिन्हें व्यवहार करने वाले नहीं जानते हैं कि वह वैसा व्यवहार करते हैं। अनभिज्ञ रहते हुए भी वैसा व्यवहार स्वभावगत होता रहता है। प्रकार्यात्मक विश्लेषण में ऐसे व्यवहारों के अध्ययन का बहुत अधिक लाभ है, क्योंकि ये उन तत्वों के प्रकार्यों पर प्रकाश डालते हैं।
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