अंतर्वस्तु विश्लेषण के उद्देश्य और महत्व - Objectives and Importance of Content Analysis
अंतर्वस्तु विश्लेषण के उद्देश्य और महत्व - Objectives and Importance of Content Analysis
सैलिज, जहोदा तथा अन्य (1973) ने अंतर्वस्तु विश्लेषण के निम्नलिखित प्रमुख उद्देश्य बताए हैं
1. अंतर्वस्तु की विशेषताओं को मालूम करना
* संप्रेषण की अंतर्वस्तु की प्रवृत्तियों का वर्णन करना।
* विद्वता के विकास को मालूम करना
* संप्रेषण के प्रति मानों का वर्णन करना
* संदेशों के प्रति जन समूह की ज्ञात विशेषताओं को जोड़ना
* संचार के स्तरों की तुलना करना
* मानदंडों के विपरीत संचार की विषय वस्तु का पता लगाना
* तकनीकी शोध प्रक्रिया में सहायता करना
* संचार सामग्री की पठनीयत को मापना
* लेखकों के व्यक्तित्व की विशेषताओं को ज्ञात करना
* शैली गत विशेषताओं की खोज करना
* प्रचार की तकनीकों का उद्घाटन एवं विश्लेषण करना
2. विषय वस्तु के कारणों को पता लगाना
* संप्रेषणकर्ताओं की अभिप्राय तथा अन्य विशेषताओं की पहचान करना
* व्यक्तियों और समूह की मनोवैज्ञानिक दशाओं का निर्धारण करना
*राजनीतिक और सैनिक खुफिया गिरी का पता लगाना
* संस्कृति और सांस्कृतिक परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं को मालूम करना
* वैधानिक साक्ष्य उपलब्ध कराना
3. अंतर्वस्तु के प्रभाव को जानना
* समुदायों के मनोभावों हितों और मूल्यों के ज्ञात करना
* ध्यान के केंद्र को उजागर करना
* संचार के प्रति विचारात्मक और व्यवहार आत्मक प्रक्रिया का वर्णन करना
अंतर्वस्तु विश्लेषण शोध के उपरोक्त विषयों को देखने से स्पष्ट है कि इस विधि का प्रयोग अनेक प्रकार की समस्याओं के अध्ययन में किया जा सकता है। जहां इस विधि का प्रयोग अंतरराष्ट्रीय महत्व के मसलों को सुलझाने में किया जा सकता है वही प्रचार माध्यमों का जनता पर पड़ने वाले प्रभाव के अध्ययन में इस विधि का महत्वपूर्ण योगदान है। अति संक्षेप में, इस विधि का प्रयोग व्यक्तित्व की विशेषताओं को जानने, जनमत का पता लगाने. सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तन की प्रवृत्ति को ज्ञात करने में सफलता पूर्वक किया जा सकता है। इस विधि का प्रयोग मनोचिकित्सा के क्षेत्र में भी किया गया है। व्यक्तियों के व्यक्तिगत लेखन तथा पत्र, डायरी, लेख, कविता, आदि के द्वारा व्यक्तित्व का विश्लेषण कर उनकी मानसिक ग्रंथियों और मन रूपी क्षेत्र का पता लगाने का प्रयत्न किया जाता है। अभी हाल कुछ शिक्षण बोर्ड ओं तथा केंद्र सरकार द्वारा गठित शिक्षण संस्थाओं द्वारा प्राइमरी कक्षाओं की पुस्तकों से कुछ ऐसी विषय सामग्री को हटाया गया है जिनका बालकों के व्यवहार पर निर्देशात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना व्यक्त की गई थी।
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