प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य - Objectives of primary education
प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य - Objectives of primary education
प्राथमिक शिक्षा बालाकों को अपने वातावरण में अनुकूलित करने की क्षमता प्रदान करती है। आपस में सहयोग एवं सद्भावना विकसित करती है। बालकों का शारीरिक एवं मानसिक विकास करती है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाती है। बच्चों में नागरिकता के गुणों का विकास करती हैं तथा उनमें नैतिकता की भावना उत्पन्न करती है। हैं
कोठारी आयोग ने अपने प्रतिवेदन में प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्यों के संबंध में लिखा है कि आधुनिक प्राथमिक शिक्षा का उद्देश्य बालक को भावी जीवन की परिस्थितियों का सामना करने में समर्थ बनाने के लिए शारीरिक तथा मानसिक प्रशिक्षण देकर उसको इस प्रकार से विकास करना है कि वह वास्तव में एक उपयोगी नागरिक बन सकें।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसन्धान एवं प्रशिक्षण परिषद् (NCERT) के द्वारा सन् 1975 में तैयार किये गये दस्तावेज में प्राथमिक शिक्षा के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित निर्धारित किये गये –
• वार्तालाप के लिए मातृभाषा का उपयोग किया जाये।
• व्यवहारिक समस्याओं के समाधान के लिए जोड़ना, घटाना. गुणा व भाग संक्रियाओं की योग्यता प्रदान करना।
• खोज, विज्ञान एवं तकनीकी के महत्व को समझना
• राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर भाव रखना।
• भारत की मिली जुली संस्कृति से परिचय कराना, छुआछूत, जातिवाद, साम्प्रदायिकता का विरोध करना।
• श्रम के प्रति अच्छा दृष्टिकोण रखना।
• सफाई एवं स्वस्थ जीवन की आदतें विकसित करना।
• अच्छाई तथा सौन्दर्य की अभिरूचि बढ़ाना।
• सहयोग की भावना विकसित करना।
• चरित्र निर्माण करना।
• सृजनात्मकता का विकास करना।
• स्वअध्ययन की आदत विकसित करना।
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