सामाजीकरण के उद्देश्य - objectives of socialization

 सामाजीकरण के उद्देश्य - objectives of socialization


जन्म के समय मनुष्य एक जैविकीय प्राणी होता है। उनमें कोई सामाजिक विशेषताएँ नहीं होती। यदि आरंभ से ही माता पिता अपनी संस्कृति तथा सामाजिक नियमों के अनुसार बालक का पालन-पोषण न करें तो निश्चय ही बच्चे का कोई भी व्यवहार सामाजिक नहीं बन सकता है। वह मानवीय व्यवहारों और मानवीय विशेषताओं से वंचित रह जाएगा। सामाजीकरण की प्रक्रिया के द्वारा समाज बच्चे को यह सीखता है कि समूह के अन्य सदस्य के साथ कैसा व्यवहार किया जाय समूह में कौन से कार्य करने उचित हैं और कौन अनुचित। इस दृष्टिकोण से सामाजीकरण एक प्रकार का सामाजिक नियंत्रन है जिसका उपयोग समूह के जीवन को शक्तिशाली बनाने तथा व्यक्तित्व के विकास के लिए किया जाता है। ब्रूम तथा सेल्जनिक ने सामाजीकरण के चार प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन किया है जो इस प्रकार हैं


I. नियमबद्धता का विकास सामाजीकरण की प्रक्रिया व्यक्ति के जीवन को नियमबद्ध बनाए रखने के लिए आवश्यक है। व्यक्ति की आंतरिक प्रेरणाएँ उसे नियम विरुद्ध व्यवहार करने को प्रेरित करती है। यह प्रक्रिया व्यक्ति को अपने लक्ष्यों को तत्काल पूरा करने पर ज़ोर नहीं देती बल्कि आवश्यकतानुसार लक्ष्यों को आगे के लिए स्थगित करने, छोड़ देने तथा संशोधित करने के लिए प्रेरित करती हैं। इसका उद्देश्य सामाजिक नियमों, मूल्यों एवं आदर्शों को ध्यान में रखते हुए व्यक्तित्व का विकास करना है।


II. सामाजिक क्षमता का विकास सामाजीकरण का उद्देश्य व्यक्ति में ऐसी क्षमताएँ पैदा करना है जिससे वह अपने आपको समाज के अनुकूल बना के तथा सभी क्षेत्रों में अपने दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वाह कर सके।

समान्यतः सरल समाजों में व्यक्ति अनुकरण द्वारा ही परंपरागत व्यवहार, कार्य एवं व्यवसाय को सीखता रहता है। किन्तु वर्तमान औद्योगिक समाज में तकनीकी ज्ञान व कौशल को अर्जित करने के लिए औपचारिक शिक्षा की आवश्यकता होती है।


III. आकांक्षाओं की पूर्ति सामाजीकरण का उद्देश्य व्यक्ति की आकांक्षाओं को उत्पन्न करना है तथा उसके रूप का निर्धारण करके व्यक्ति द्वारा उनकी आदर्श पूर्ति में सहायता पहुँचती है। उच्च तकनीकी ज्ञान से पूर्ण समाजों में व्यक्ति उद्योगपति, वैज्ञानिक अथवा इंजीनियर बनने की आकांक्षा रखते हैं।


IV. सामाजिक दायित्व की पूर्ति का प्रशिक्षण सामाजीकरण द्वारा व्यक्ति को विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न प्रकार की सामाजिक भूमिका निभाने की योग्यता प्राप्त होती है। व्यक्ति को विभिन्न पदों पर दायित्व निभाने होते हैं। सामाजीकरण की प्रक्रिया यह सिखाती है कि विभिन्न परिस्थितियों में व्यक्ति अन्य लोगों से किस प्रकार सामंजस्य स्थापित करे।


इस प्रकार सामाजीकरण प्रक्रिया के द्वारा समाज बालक को यह सीखता है कि यदि उसे अपने समुदाय के सदस्यों से मिलकर रहना है तो उसे किस प्रकार का व्यवहार करना है जिससे उसकी व्यक्तिगत एवं सामाजिक दायित्वों की पूर्ति हो सके।