मूल वर्ग - parent class

मूल वर्ग - parent class


मार्क्स ने यह स्वीकार किया कि वर्ग विभाजित समाजों में अनेक होते हैं। पूँजीवादी समाज के संबंध में भी उन्होंने कहा कि पूँजीपति वर्ग के अतिरिक्त एक निम्न पूँजीपति वर्ग होता है, सर्वहारा के अतिरिक्त एक निम्न सर्वहारा वर्ग होता है। इन सबके बावजूद प्रत्येक वर्ग विभाजित समाज में मूलतः दो वर्ग (Basic classes) होते हैं- एक वर्ग जो उत्पादन की शक्तियों का सबसे प्रभावी मालिक और नियंत्रक होता है और दूसरा वह जो उत्पादन की प्रक्रिया में अपना श्रम प्रदान करता है। यही दोनों प्रभावी वर्ग होते हैं। मूल वर्गों के कारण समाज के चरित्र का पता चलता है। समाज को बनाने और चलाने में इन्हीं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इस आलोचना का मुख्य स्रोत मैक्स वेबर की दृष्टि है जिन्होंने कहा कि औद्योगिक समाजों में उद्योगपतियों एवं मजदूर वर्ग के बीच पेशेवर लोग एवं निम्न मध्यवर्ग के लोग होते हैं।

मार्क्स के आलोचकों ने कहा कि गैर श्रमिक एवं गैर उद्योगपति वर्ग का जीवन अक्सर बेहतर होता है। इस मध्यवर्ग में जो उच्च मध्यवर्ग है उसकी सामाजिक स्थिति भी अच्छी होती है एवं उसकी भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। इसमें आमतौर पर प्रबंधकों को सम्मिलित किया जाता है। एंथनी गिडेंस ने यह कहा कि मध्यवर्ग एक ही है और वह अपने बौद्धिक एवं शैक्षिक क्षमताओं के कारण अपनी जीविका का उपार्जन करता है। मार्क्स की मजदूर वर्ग की धारणा के संबंध में भी अनेक आलोचनाएँ हैं। राल्फ डहरेनडोर्फ ने कहा कि मजदूर वर्ग का विभेदीकरण हो गया है। अब मजदूर वर्ग स्पष्ट रूप से तीन श्रेणियों अकुशल, अर्ध एवं कुशल मजदूरों में विभाजित है। रोजर पेन (Roger Penn) ने कहा कि ऐसा मजदूर वर्ग में विभाजन मार्क्स के समय भी था। यह बीसवीं शताब्दी की विशेषता नहीं है।