पारसन्स का पद्धतिशास्त्र - parsons methodology

पारसन्स का पद्धतिशास्त्र - parsons methodology


पारसन्स मूल रूप से प्रकार्यवादी समाजशास्त्री है। उसने अपनी संपूर्ण विश्लेषणाओं में प्रकार्यवादी पद्धति को ही अपनाया है। इसलिए पद्धतिशास्त्रीय विशेषताओं की दृष्टि से पारसन्स के प्रकार्यवाद का विश्लेषण आवश्यक है। अपनी प्रकार्यवादी पद्धति को पारसन्स ने हर्बर्ट स्पेंसर के विचारों पर आधारित किया है। उसने समाज को सावयवी व्यवस्था में विश्लेषित करने की कोशिश की है। पारसन्स ने अपने सामाजिक क्रिया सिद्धांत और सामाजिक व्यवस्था के सिद्धांतों के प्रतिपादन में इसी पद्धति का अनुसरण किया। इस वृद्धि से पारसन्स प्रत्यक्षवादी भी था। उसने प्रत्यक्षवादी दृष्टिकोण अपनाकर ही सामाजिक घटनाओं के अध्ययन करने की संपति दी है।


लंदन स्कूल ऑफ इकानामिक्स ने पारसन्स ने प्रकार्यवादी और प्रत्यक्षवादी विचारकों का अध्ययन किया। वैसे पारसन्स की पद्धति की सृष्टि मेलिनोवास्की के विचारों से ही हुई है। इंग्लैंड में पारसन्स ने इस दृष्टि से स्पेंसर की कृतियों का भी गहन मनन-चिंतन किया था। पारसन्स ने सामाजिक व्यवस्था को क्रिया व्यवस्था के नाम से संबोधित किया है।

इस अंतसंबंधित व्यवस्था को स्पष्ट करते हुए पारसन्स ने व्यक्तित्व व्यवस्था, सांस्कृतिक व्यवस्था और सामाजिक व्यवस्था के संबंधों की खोज करके उनमें प्रकार्यवादी संबंधों को इंगित किया है। मेलिनोवास्की के विचारों से प्रेरणा पाकर ही पारसन्स ने इस व्यवस्था को सावयवी व्यवस्था के रूप में सिद्ध करने की चेष्टा की हैं।


पारसन्स ने अपने पद्धतिशास्त्र में प्रकार्यात्मक पूर्व आवश्यकताओं के विचार का भी प्रतिपादन किया है। उसने इन प्रकार्यवादी आवश्यकताओं को मानवीय आवश्यकता के अनुरूप बताया है। उसने यह भी सिद्ध करने की चेष्टा की है कि सभी सामाजिक व्यवस्थाएँ इन्ही आवश्यकताओं की पूर्ति करने का ध्येय रखती हैं। अपनी पद्धति की सार्थकता को इंगित करते हुए पारसन्स ने लिखा है कि इस पद्धति से सामाजिक व्यवस्था का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सकता है। उसने यह भी स्पष्ट किया है कि समाज की किसी भी व्यवस्था का अध्ययन संपूर्णता में होना चाहिए। इस भाँति पारसन्स ने दूसरे शब्दों में दुर्खिम और मैक्स वेबर के पद्धतिशास्त्र को ही अपनाया है।


पारसन्स ने लिखा है कि समाजशास्त्रीय अध्ययनों में क्रिया व्यवस्था का अध्ययन आवश्यक है। इस व्यवस्था में परिस्थिति के तत्त्व को पारसन्स ने प्रमुख माना है। परिस्थिति से पारसन्स को तात्पर्य सामाजिक परिस्थिति ही है। इस प्रकार मानव व्यवहार एवं क्रिया को प्रभावित करने वाले सभी तत्वों के प्रकार्यवादी विश्लेषण पर ही पारसन्स ने जोर दिया।