पितृसत्ता - patriarchy

पितृसत्ता - patriarchy


पितृसत्ता एक विचारधारा है और ठीक उसी समय यह उत्पादन और पुनर्उत्पादन के लिए स्त्री श्रम की अधीनता हेतु एक भौतिक संरचना है। व्यवहार में पितृसत्ता स्त्रियों में पितृसत्तात्मक कायदों को अंतर्निहित करवा कर या स्त्रियों की मिलीभगत को कुछ निश्चित रूपों में पुरस्कार करने उनकी सहमति प्राप्त करती है। रेडिकल स्त्रीवादियों ने तथाकथित पवित्र कहे जाने वाले संस्थानों परिवार, शादी, स्त्री-पुरुष रिश्ते में निहित सत्ता संबंधों का खुलासा किया और पर्सनल इज पॉलिटिकल' का नारा दिया। पितृसत्ता स्थान, समय और समाज में भिन्न-भिन्न रूप धारण किए रहती है।


उमा चक्रवर्ती ने इस विश्लेषण को इन शब्दों में बताया है -


"वर्ग, जाति और जेंडर अंतर्ग्रथित हैं।

वे एक-दूसरे को आकार प्रदान करते हैं; शादी की संस्था, यौनिकता और पुर्नउत्पादन जाति व्यवस्था की आधारशिला है। असमानता इसी के द्वारा बनाई रखी जाती है। शादी की संरचना ही वर्ग और जाति असमानता और पुर्नउत्पादन व्यवस्था की कठोर नियंत्रित प्रणाली द्वारा समस्त उत्पादन व्यवस्था को पुर्नउत्पादन करती है।' चक्रवर्ती, उमा (2006). जेंडरिंग कास्ट : थ्रू द फेमिनिस्ट लेंस कोलकाता: स्त्री, पू. 27


ऐसे विश्लेषण पर आधारित अनेक कार्य भारत में स्त्री इतिहास की नई समझ के साथ आए। इनमें है:-


• कुमकुम सरकारी, सुदेश वेद (सं) : रीकास्टिंग वूमन, ऐसेज इन कोलोनियम हिस्ट्री (1989)


• डॉ. शरद पाटिल : मार्क्सिज्म, फुले एंड अंबेडकरिज्म 1993 )


• गेल आम्बेट : रिइनवेंटिंग रिवोल्यूशन (1993)

• लीला कस्तूरी और वीणा मजूमदार (सं.) : वूमन इन इंडियन नेशनलिज्म (1994)


• मेरी ई. जॉन और जानकी नायर (सं.) : ए क्वेशचन ऑफ सायलेंस? द सेक्सुअल इकॉनामिज ऑफ मॉडर्न इंडिया (1998)


• उमा चक्रवर्ती : रीराईटिंग हिस्ट्री: द लाईफ एंड टाइम्स ऑफ पंडिता रमाबाई (1998)


• वी. गीता, वी. एस राजदुरई : टुवर्डस ए नॉन-ब्राह्मण मिलेनियम : फ्राम लोथी थॉस टू पेरियार (1998)


• कुमकुम रॉय (सं.) : वूमन इन अल इंडिया सोसायटीज (1999)


• कुमकुम संगारी और चक्रवर्ती (सं.) : फ्रॉम मिथ्स टू मार्केट ऐसेज ऑन जेंडर (1999)


• उमा चक्रवर्ती : जेंडरिंग थ्रु ए फेमिनिस्ट लेस (2003)