व्यक्ति संज्ञान प्राप्त करने में अतिशय मितव्ययी - person very frugal in obtaining cognizance

व्यक्ति संज्ञान प्राप्त करने में अतिशय मितव्ययी - person very frugal in obtaining cognizance


सामाजिक संज्ञान प्राप्त करने के प्रक्रम में व्यक्ति अपूर्ण तर्कना का उपयोग कर्ता है और सामाजिक अनुमान या निर्णय करने में विविध प्रकार की त्रुटियाँ करता है। ये त्रुटियाँ मात्र अभिप्रेरणात्मक कारकों के प्रभाव स्वरूप नहीं होती। लोग प्रायः अल्पमात्रा की सूचनाओं के आधार पर उन्हें यादृच्छिक रीति से प्रक्रमित कर सामाजिक अनुमान कर लेते हैं। ऐसे अनुमान व्यक्ति की पूर्वधारणाओं एवं प्रत्याशाओं से भी प्रभावित होते हैं। डावेस (1976) ने बहुत पहले स्पष्ट किया था कि लोग समझते हैं कि वे सामाजिक निर्णय करते समय प्रचुर मात्रा में सूचनाओं को ध्यान में रखते हुए उनका जटिल ढंग से एकीकरण करने के बाद ही निष्कर्ष निकालते हैं, किन्तु वास्तविकता यह कि लोग एक या दो प्रमुख सूचना संकेतों के आधार पर बिना उनका उचित ढंग से मूल्यांकन किये सामाजिक निर्णय कर लेते हैं। इसलिए व्यक्ति की संज्ञानात्मक अति मितव्ययी माना जाता है।