व्यक्तिक प्रत्यक्षीकरण : स्वरूप एवं मापन - Personal Perception: Form and Measurement

व्यक्तिक प्रत्यक्षीकरण : स्वरूप एवं मापन - Personal Perception: Form and Measurement


किसी भी व्यक्ति के संबंध में उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर उस व्यक्ति की छवि निर्मित करने के प्रक्रम को व्यक्ति प्रत्यक्षीकरण का नाम दिया जाता है। इस प्रकरण में व्यक्ति का विविध प्रकार से वर्गीकरण किया जाता है। व्यक्ति के संबंध में निर्मित की गई छवि अपेक्षाकृत अधिक स्थाई होती है। प्रेक्षक के लिए व्यक्ति की प्रथम छवि अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि प्रथम छवि में स्पष्ट होने वाले शीलगुणों को अधिक महत्व दिया जाता है। प्रेक्षक, जिस व्यक्ति से संबंधित सूचनाओं का संगठित रूप लेता है, वही उसकी छवि होती है। सामान्यतः प्रत्येक व्यक्ति के व्यवहार उद्देश्यपूर्ण होते हैं। इसीलिए प्रेक्षक व्यक्ति के व्यवहारों का प्रेक्षण कर उसके शीलगुणों, उसकी भावनाओं तथा उसके विचारों का अनुमान कर लेता है। किसी भी व्यक्ति के साथ अंतरक्रिया करते हुए हम उसके अनेक व्यवहारों का प्रेक्षण कर लेते हैं और इन व्यवहारों में नयी सूचना संकेतों को संगठित कर उसकी छवि निर्मित करते हैं।

उदाहरण कल्पना कीजिए कि आपके सामने कोई व्यक्ति जो अच्छे परिधान में हो, नजरें नीची हो तथा धीरे-धीरे आपके पास आये और आपसे किसी प्रकार की सहायता के लिए निवेदन करें। आप उसके निवेदन को अस्वीकृत कर देते हैं। क्योंकि उसके अनुरोध को मान लेना आपके द्वारा निर्धारित नियमों के विपरीत ही नहीं अपितु अनैतिक भी है। आपके मना करने के बावजूद व्यक्ति बार-बार आप से मदद की गुहार लगाता है। बार-बार वह आपकी उदारता को याद दिलाता है। आप इस युवक की कैसी छवि निर्मित करेंगे? निश्चित रूप से आप उसे एक स्वार्थी, आत्म-केंद्रित तथा अवांछनीय व्यक्ति के रूप में प्रदर्शित करेंगे। एंडरसन (1981) ने प्रदर्शित किया है कि लोग प्रथम छवि से स्पष्ट होने वाले शीलगुणों को व्यक्ति के मूल्यांकन में सर्वाधिक महत्व प्रदान करते हैं। प्रथम छवि के आधार पर ही व्यक्ति के बाद में होने वाले व्यवहार एवं उसके संबंध में प्राप्त होने वाली सूचनाओं का तात्पर्य समझा जाता है तथा सामान्य से अधिक धनात्मक या ऋणात्मक मूल्य दिया जाता है। मनोवैज्ञानिकों ने इसे प्राथमिकता प्रभाव भी कहा है। मैक आर्थर तथा बेरन (1983) ने स्पष्ट किया कि शारीरिक बनावट इत्यादि के संबंध में सूचनाओं की तात्कालिक उपलब्धता के कारण लोग यह मान लेते हैं कि यह व्यक्ति के शीलगुणों को प्रतिबिंबित करती है और इसके आधार पर ही व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक गुणधर्म का मूल्यांकन कर लेते हैं।