समाजशास्त्र में प्रकार्यवाद का स्थान - Place of Functionalism in Sociology

समाजशास्त्र में प्रकार्यवाद का स्थान - Place of Functionalism in Sociology


समाजशास्त्र या आधुनिक समाजशास्त्रीय सिद्धांत में प्रकार्यवाद का बहुत ही अधिक महत्वपूर्ण स्थान है। यदि यह कहा जाए कि प्रकार्यवाद आधुनिक समाजशास्त्रीय सिद्धांत पर सर्वत्र छाया हुआ है और आज अपना अधिपत्य जमाया हुआ है. तो अनुचित न होगा। आधुनिक सिद्धांतकारों में अधिकांश प्रकार्यवादी हैं। मर्टन, पारसंस, शील्स, नडेल, होमंस (Homans), लेविन (Kurt Lewin). लेवी (Marion J. Levy), लिंटन (Ralph Linton ), मरडॉक (G.P. Murdock), रूथ बेनीडिक्स (Ruth Benedict), कूले (Charles H. Coooley) आदि महत्वपूर्ण प्रकार्यवादी हैं।


आधुनिक समाजशास्त्रीय सिद्धांतों में सामाजिक क्रिया (Social Action), सामाजिक संरचना (Social Structure), सामाजिक व्यवस्था (Social System), प्रकार्य और अकार्य (Function and Dysfunction). नियमहीनता Anomie) आदि के सिद्धांत प्रमुख हैं। इन सभी सिद्धांतों में मुख्य योगदान प्रकार्यवादियों का है। सामाजिक संरचना और प्रकार्य एवं अकार्य तो प्रकार्यवादी का प्रमुख केंद्रीय विषय ही है।

मर्टन ने इनको विशेष रूप से परिमार्जित किया है। सामाजिक क्रिया का सिद्धांत टालकट पारसन्स के द्वारा व्यवस्थित किया गया है, जो कि प्रकार्यवादी ही है। सामाजिक व्यवस्था का सिद्धांत भी पारसन्स द्वारा विशेष रूप से प्रतिपादित किया गया है। मर्टन ने भी सामाजिक व्यवस्था का सिद्धांत प्रतिपादित किया है। नियमहीनता के सिद्धांत को मुख्य रूप से मर्टन ने प्रतिपादित किया है।


उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट है कि अधिकांश आधुनिक समाजशास्त्रीय सिद्धांतों का प्रतिपादन प्रकार्यवादियों द्वारा ही किया गया है और वे इस क्षेत्र में बहुत महत्व पूर्ण है। इसलिए आधुनिक समाजशास्त्रीय सिद्धांत या समकालीन समाजशास्त्र में प्रकार्यवाद का महत्वपूर्ण एवं सबसे श्रेष्ठ स्थान है।