भारत की राजनितिक विचारधाराएं , अंबेडकरवादी विचारधारा - Political Ideology of India, Ambedkarite Ideology
भारत की राजनितिक विचारधाराएं , अंबेडकरवादी विचारधारा - Political Ideology of India, Ambedkarite Ideology
अंबेडकरवादी विचारधारा (Ambedkar's Political Philosophy):
डॉ. बाबासाहब अंबेडकर अंबेडकरवादी विचारधारा के जनक है। डॉ. बाबासाहब अंबेडकरजी को आधुनिक भारत के निर्माता, भारतीय संविधान के निर्माता, बहुजनों के मसीहा के रूप में जाना जाता है। डॉ. बाबासाहब अंबेडकर सामान्य एवं बहुजनों की उत्थान, समानता, न्याय, स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता, जाती उन्मूलन, विकास के समान अवसर शिक्षा एवं संधि की उपलब्धता आदि की पक्षधर रहे है। जवाहरलाल नेहरु के शब्दों में, वे "हिंदू समाज के अत्याचारपूर्ण तत्वों के प्रति विद्रोह के प्रतिक" थे। (ओ.पी.गाबा : राजनीती-चिंतन की रुपरेखा, पृष्ठ सं. 424 ) डॉ. बाबासाहब अंबेडकरजीने अस्पृश्यता एवं छुआछुत का स्वयं अनुभव किया। उन्होंने यह जाना की हिंदू धर्म की वर्णव्यवस्था ही अन्यायकारक प्रथाओं का कारण है। उनके अनुसार, अस्पृश्यता की जड़े वर्णव्यवस्था में निहित है। उन्होंने समाज में अछूत एवं अस्पृश्य माने जानेवाली जातियों को संगठित किया।
शिक्षा, संगठन एवं संघर्ष का मूलमंत्र दिया। वह दलितों के आत्मसुधार में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि दलित, अस्पृश्य एवं बहुजनों में के विकास के लिए कोई मसीहा नहीं आएगा। बल्कि उन्हें स्वयं दीप होना पड़ेगा अर्थात स्वयं का विकास स्वयं ही करना होगा। मदिरा पान, गोमांस भक्षण, अस्वछता आदि बुरी आदतों को हटाना होगा। उन्होंने समाज को आत्मसन्मान पूर्ण व्यवहार के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अछूतों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। अछूतों को अपने अधिकारों के लिए जागृत किया। दलितों के न्याय हक्क के लिए प्रदीर्घ आंदोलन चलाये। कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह, चवदार तालाब का सत्याग्रह, अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह आदि जनआंदोलन सफलतापूर्वक पूर्ण किये। हिंदू धर्म के अंतर्गत दलितों के उद्धार की संभावना धूमिल होते देखकर हिंदू धर्म का त्याग कर अपने लाखो अनुयायियों के साथ 14 अक्तूबर 1956 में बौद्ध धर्म का स्वीकार किया।
डॉ. अंबेडकरजी ने अछूत एवं अस्पृश्यों के उद्धार के एकमात्र साधन शिक्षा माना है। मिलिंद महाविद्यालय, औरंगाबाद, सिद्धार्थ महाविद्यालय, मुंबई की स्थापना।
बहुजनों के जागृति के लिए मूकनायक, बहिष्कृत भारत, प्रबुद्ध भारत आदि साप्ताहिक एवं पाक्षिक चलाये। जो बहुजनों के जागृति में दीपस्तंभ बने। कालाराम मंदिर प्रवेश सत्याग्रह, चवदार तालाब का सत्याग्रह, अंबादेवी मंदिर प्रवेश सत्याग्रह आदि जनआंदोलन जनशिक्षा के लिए प्रेरणास्त्रोत बने। बहिष्कृत हितकारिणी सभा, स्वतंत्र मजूर पक्ष आदि राजनितिक पार्टी की सहायता से राजनितिक जागृति की। शासन के विभिन्न अंगो में उचित एवं पर्याप्त प्रतिनिधित्व के लिए असीम संघर्ष किया। डॉ. बाबासाहब अंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान भारतीयों के समग्र एवं समान विकास का मुलस्त्रोत है। भारतीय समाज के आशा-आकांक्षा का मूलाधार है। बालविवाह, विधवा विवाह मान्यता, स्त्री सहभागिता, शिक्षा के समान अवसर, शासन के विभिन्न अंगों में पर्याप्त एवं उचित प्रतिनिधित्व, धर्मनिरपेक्षता, न्याय का अधिकार, व्यक्ति स्वातंत्र्य, जातिभेद उन्मूलन, राज्य नीति निदेशक तत्व, सामाजिक-आर्थिक पुनर्रचना कानून व्यवस्था आदि का सक्षम प्रावधान भारतीय संविधान में अंतर्निहित है। डॉ. अंबेडकरजी के अनुसार लोकतंत्र केवल शासनप्रनाली नहीं यह जिवनप्रनाली है। शासनप्रनाली के रूप में लोकतंत्र को संसदीय लोकतंत्र एवं एकात्मक शासनप्रनाली के रुप में स्वीकार किया।
सामजिक आर्थिक समानता, बहुदलीय प्रणाली, सक्षम विपक्ष आदि सफल लोकतंत्र की कसोटी है।
अंबेडकरवादी अनुयायियों ने दलितों के उत्थान के लिए कार्य करने के कारण कही लोग अंबेडकरवादी विचारधारा को ही 'दलित विचारधारा' मानते है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ़ इंडिया, बहुजन समाज पार्टी, अंबेडकरवादी रिपब्लिकन पार्टी आदि अंबेडकरवादी एवं दलित विचारधारा पर आधारित है। डॉ.बाबासाहब भीमराव अंबेडकर, राजर्षि छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले, क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले. महाराजा सयाजीराव गायकवाड आदि विभूतियों को अंबेडकरवादी विचारधारा के प्रेरणास्त्रोत मानते है। उक्त महापुरुषों के विचारों का भारतीय राजनीती में सक्षम प्रभाव दिखता है। कांशीरामजी, सुश्री मायावती रा.सू. गवई, अॅड. प्रकाश अंबेडकर, रामदासजी आठवले, प्रो. जोगेंद्र कवाडे, डॉ.राजेंद्र गवई, अँड. सुलेखाताई कुंभारे, चंद्रकांत हंडोरे आदि राजनीतिकों को अंबेडकरवादी विचारधारा एवं दलित विचारधारा के अनुयायी मानते है।
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