भारत की राजनितिक विचारधाराएं , हिंदुत्ववादी विचारधारा - Political ideology of India, Hindutva ideology

भारत की राजनितिक विचारधाराएं , हिंदुत्ववादी विचारधारा - Political ideology of India, Hindutva ideology

हिंदुत्ववादी विचारधारा (Hinduism Political Philosophy) : 


बाल गंगाधर तिलक, वि.दा.सावरकर, स्वामी विवेकानंद, लाला लजपतराय, लाला हरदयाल आदि हिंद राष्ट्रवाद के पक्षधर थे। बाल गंगाधर तिलकजी ने गणपति उत्सव एवं शिवाजी उत्सव के सार्वजनिक आयोजन का प्रारंभ किया यह सर्वज्ञात है। कभी-कभी तिलक पर यह आरोप किया जाता है कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रवाद के साथ हिंदू राष्ट्रवाद को मिला दिया और गणपति तथा शिवाजी उत्सव आयोजित करके हिंदुत्व को बढ़ावा दिया। (ओ.पी.गाबा: राजनीती- चिंतन की रुपरेखा, पृष्ठ सं. 369) विनायक दामोदर सावरकर द्वारा 1904 में अभिनव भारत संगठन स्थापन किया। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने समस्त जीवन में हिंदूओं की एकता के लिए कार्य किया। कालेपानी की सजा से मुक्ति मिलने के उपरांत अपनी सारी शक्ति हिंदू महासभा के कार्य को अर्पित की।

वह हिंदू महासभा के मूर्धन्य विद्वान माने जाते थे। हिंदू महासभा के अहमदाबाद, मदुरा आदि अधिवेशन के अध्यक्ष रहें। उनके हिंदू विचारधारा के कारण उन्हें स्वतंत्रता समारोह में आमंत्रित नहीं किया गया। उन्हें गांधीजी विरोधी एवं राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ का हितैषी माना जाता था। इसी कारण उन्हें गांधीजी की हत्या के षड्यंत्र में नथूराम गोडसे, आप्टे के साथ हिरासत में लिया किन्तु न्यायालय के निकाल के बाद बरी घोषित किया। वह हिंदुओं की सांस्कृतिक महत्ता. हिंदू राष्ट्रवाद एवं हिंदू पुनरुत्थान के पक्षधर थे। हिंदुओ को संगठित करने का उन्होंने अधिक प्रयास किया। उनका मानना था कि, भाषा, इतिहास, संस्कृति, देश, धर्म आदि तत्वों की समानता के कारण हिंदुओं को राष्ट्र के रूप में स्वीकृत किया जा सकता है। जो व्यक्ति सिंधु नदी से समुद्रपर्यंत संपूर्ण भारत को अपनी पितृभूमि तथा पुण्यभूमि मानता है. वही हिंदू है। उक्त तत्व का पुरस्कार करने वाला वर्ग हिंदुत्ववादी माना जा सकता है।" उन्होंने इस परिभाषा की सहायता से हिंदू राष्ट्रवाद का प्रतिपादन किया। कहा जाता है

वह मुसलमानों को खुश करनेवाली नीति के समर्थक नहीं थे। राष्ट्रप्रेम, प्रादेशिक एकता एवं अखंडता आदि हिंदुत्व के लक्षण मानते थे। हिंदुत्व की धारणा को मानवतावाद एवं सार्वभौमवाद की धरातल पर देखते रहें। हिंदुत्व के कर्मयोगी जीवन पर विश्वास रखते थे। स्वतंत्र पूर्व एवं स्वातंत्रोत्तर काल में अखिल भारतीय हिंद महासभा (1915), बजरंग दल (1 आक्टो. 1984). विश्व हिंदू परिषद (29 आगस्त 1964), राष्ट्रिय स्वंयसेवक संघ (27 सप्टे. 1925), भारतीय जनसंघ, भारतीय जनता पक्ष, शिवसेना, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना आदि संगठन एवं संचालक और अनुयायी हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद के समर्थक रहें। हिंदुत्ववादी विचारधारा के आधारपर अटल बिहारी वाजपेयी एवं नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री एवं मनोहर जोशी एवं देवेन्द्र फडणविस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने। के.बी. हेडगेवार, बी.एस.मुंजे, मा.स. गोलवलकर, मदन मोहन मालवीय, बाल ठाकरे. पी. सुदर्शन, प्रवीन तोगड़िया, मोहन भागवत, भैयाजी जोशी, मुरली मनोहर जोशी, लाल कृष्ण अडवाणी, उमा भारती, उद्धव ठाकरे, राज ठाकरे आदि विभूतियाँ हिंदुत्ववादी राष्ट्रवाद का पुरस्कार करते है।