पोर्नोग्राफी बहस - pornography debate

पोर्नोग्राफी बहस - pornography debate


रेडिकल स्त्रीवादी यौन अश्लीलता को प्रसारित करने वाले साहित्य को कटघरे में खड़ा करते हुए, कहती हैं कि इसके द्वारा स्त्रियों की यौन इच्छाओं अथवा जरूरतों को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया जाना एवं यौनिक कल्पनाओं (fantasies) को गढ़े जाने जैसी चीजें दरअसल उन्हें न सिर्फ यौन वस्तु के रूप में चित्रित किए जाने की प्रक्रिया है, बल्कि यह काल्पनिकताएँ स्त्रियों की पीड़ा, यौन प्रताड़नाओं, उनके अपमान आदि को कामोद्दीपन (eroticize) में बदल देती हैं। कैथलीन बैरी अश्लील साहित्य को सांस्कृतिक परपीड़न की विचारधारा' मानती हैं। इस संदर्भ में रॉबिन मॉर्गन कहती हैं अश्लील साहित्य सिद्धांत है और बलात्कार उसका व्यवहार। रोमानियत की काल्पनिकता और स्त्रियों पर बलात यौन संबंध पितृसत्ता द्वारा लगभग साथ साथ ही किया जाता है। संभवतः इन्हीं कारणों के आधार पर रेडिकल स्त्रीवादी यह तर्क देती हैं कि पितृसत्ता के अंतर्गत विषमयौनिकता अपने आप में स्त्रियों के लिए पीड़ादायक होती है।