सामाजिक व्यवस्था के सकारात्मक एवं नकारात्मका पक्ष - positive and negative aspects of social system

सामाजिक व्यवस्था के सकारात्मक एवं नकारात्मका पक्ष - positive and negative aspects of social system


पारसन्स ने सामाजिक व्यवस्था के दो पक्षों का उल्लेख किया-


(1) सकारात्मक पक्ष और


(2) नकारात्मक पक्ष


सकारात्मक पक्ष


सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत कर्ताओं की स्थितियाँ और कार्य स्पष्ट रूप से परिभाषित रहते हैं। व्यक्तियों को इन स्थितियों के अनुरूप ही काय करते रहना चाहिए।

इस प्रकार की प्रेरणा सामाजिक व्यवस्था और सांस्कृतिक व्यवस्था से प्राप्त होती रहती है। सामाजिक व्यवस्था का सकारात्मक पक्ष यही है कि वह कुछ कार्य करने को कहती है। जो आदर्श नियम यह करना चाहिए ( की प्रवृत्ति के होते हैं. वे सकारात्मक कहलाते हैं। 


नाकरात्मक पक्ष


सामाजिक व्यवस्था कुछ कार्य नहीं करने के लिए भी कहती है। यह उसका नकारात्मक पक्ष है। कुछ आदर्श नियम इस प्रकार के होते हैं जो निषेधात्मक होते हैं। नकारात्मक पक्ष का पालन तभी संभव है जबकि व्यक्तियों की आवश्यकताएँ सकारात्मक पक्ष से पूरी होती रहेंगी। पारसन्स का कहना है कि यह संभव नहीं हैं कि जब व्यक्तियों की सब इच्छाएँ कोई भी सामाजिक व्यवस्था पूरी कर सके। पर हर सामाजिक व्यवस्था के लिए यह अनिवार्य है कि सब व्यक्तियों की न्यूनतम आवश्यकताएँ पूरी करने की व्यवस्था करें अन्यथा व्यक्ति निषेधात्मक या नकारात्मक पक्ष का पालन नहीं करेंगे। वैसे हर सामाजिक व्यवस्था का यह प्रयास होना चाहिए कि अधिकतम व्यक्तियों की अधिकतम इच्छाओं की पूर्ति करने की व्यवस्था करे, तभी सामाजिक व्यवस्था स्थाई रह सकती है।


पारसन्स का कहना है कि हर सामाजिक व्यवस्था में कुछ ऐसी शक्तियाँ विद्यमान रहती हैं, जिनके कारण सामाजिक व्यवस्था को व्यक्तियों एवं समूहों को हानि पहुँचाना एक अनिवार्य हो जाता है। युद्ध एक ऐसी ही शक्ति है। सामाजिक व्यवस्था के स्थायित्व एवं निरंतरता के लिए युद्ध में विजय प्राप्त करना अनिवार्य होता है और युद्ध में विजय प्राप्त करने के लिए कुछ व्यक्तियों को मरना अनिवार्यता है। पारसन्स ने लिखा है - “यह वास्तव में एक बहुत ही सामान्य घटना है कि सामाजिक शक्तियाँ कुछ व्यक्तियों और सब व्यक्तियों की कुछ इच्छाओं या आवश्यकताओं को चोट पहुँचाने अथवा नष्ट करने के लिए प्रत्यक्ष रूप से उत्तरदाई होती हैं और हालाँकि यह कम किया जा सकता है, परंतु इस तथ्य की अधिक संभावना है कि इसे व्यावहारिक सत्यमाओं की परिस्थितियों के अंतर्गत समाप्त नहीं किया जा सकता।"