सम्भावित या दैव निदर्शन - Possible or fateful demonstration
सम्भावित या दैव निदर्शन - Possible or fateful demonstration
निदर्शन में चयन किए जाने के संयोग' को संभाव्यता कहा जाता है। इस प्रकार के प्रतिचयन की यह विशेषता है कि इसमें समग्र के प्रत्येक इकाई को चुने जाने की संभावना बराबर की रहती है। निदर्शन के सभी प्रकारों में दैव निदर्शन सबसे अधिक महत्वपूर्ण तथा सर्वाधिक प्रचलित प्रविधि है। इसके अंतर्गत अध्ययनकर्ता को समूह में से कुछ व्यक्तियों अथवा इकाइयों को चयन करने की कोई व्यक्तिगत स्वतंत्रता नहीं होती बल्कि इकाइयों के चयन का कार्य कुछ विशेष प्रविधियों की सहायता से पूर्णतया संयोग पर छोड़ दिया जाता है। इसका तात्पर्य यह है कि दैव निदर्शन के अंतर्गत एक प्रतिनिधिपूर्ण चुनाव के लिए समग्र की सभी इकाइयों को चुने जाने का समान अवसर प्रदान किया जाता है। ऐसे निदर्शन में इकाइयों का चयन बहुत कुछ संयोग अथवा दैव पर आधारित होता है,
इसलिए ऐसे निदर्शन को देव निदर्शन कहा जाता है। इस निदर्शन की प्रकृति को स्पष्ट करते हुए फ्रैंकयेट्स का कथन है कि, "दैव निदर्शन वह है जिसमें समग्र अथवा जनसंख्या की प्रत्येक इकाई को निदर्शन में सम्मिलित होने का अवसर प्राप्त होता है।" गुडे तथा हॉट के अनुसार, "दैव निदर्शन के लिए समग्र की सभी इकाइयों को इस प्रकार क्रमबद्ध किया जाता है कि चयन प्रक्रिया समग्र की प्रत्येक इकाई को चुनाव की समान संभावना प्रदान कर सके।" संभावित या दैव निदर्शन का तात्पर्य यह नहीं है कि अध्ययनकर्ता किन्ही भी इकाइयों का मनमाने रूप से चुनाव कर ले। निदर्शन की इस विधि का उद्देश्य सभी इकाइयों को चुने जाने का समान अवसर देना है। इस दृष्टिकोण से संभावित निदर्शन प्राप्त करने के लिए अनेक प्रविधियों अथवा प्रणालियों का उपयोग किया जाता है।
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