द्विमार्गी डाक सम्प्रेषण का सिद्धान्त - Principle of two way mail transmission
द्विमार्गी डाक सम्प्रेषण का सिद्धान्त - Principle of two way mail transmission
जॉन बाथ स्वीडन के प्रसिद्ध हरमोंड्स पत्राचार शिक्षा संस्था से संबन्धित जॉन ए. बाथ का नाम पत्राचार दूर शिक्षा में द्वि-मार्गी सम्प्रेषण के सम्प्रेषण से जुड़ हुआ है। इसमें दूर शिक्षा सामाग्री के प्रतिमान विकसित करने का प्रयास किया है।
मूलतः जॉन बाथ एवं होमबर्ग के विचार में कोई अंतर नहीं है, फिर भी जो कुछ अंतर दिखाई पड़ता है वह बाथ द्वारा द्वि मार्गी सम्प्रेषण तथा साथ ही दूर शिक्षा सामाग्री के प्रतिमान पर विशेष बल प्रदान किए जाने से है। किन्तु बाथ के विचारों को अलग से प्रस्तुत करने के कुछ विशेष कारण है। ये कारण अग्रलिखित है
बाथ का मानना है कि शिक्षा को औद्योगिकृत रूप प्रदान करके दूर शिक्षा जनशिक्षा का एक व्यापक माध्यम बन गई है।
साथ ही वह भी स्वीकार करता है कि दूर शिक्षा अनिवार्य रूप से स्वतंत्र अध्ययन है। किन्तु कोर्स लेखक, संपादक, ट्यूटर तथा कोर्स डिजाइनर के रूप में किए गए कार्यों के अनुभवों ने बाथ को इन विचारों कि ओर प्रेरित किया कि
• “एक पत्राचार शिक्षक (ट्यूटर) रचनात्मक आलोचना, प्रोत्साहन तथा विद्यार्थि कि अधिगम समस्याओं के प्रति व्यक्तिगत जुड़ाव प्रदर्शन के माध्यम से उसे उल्लेखनीय सुधार हेतु उत्तेजित एवं अभिप्रेरित कर सकता है।
• “दूर शिक्षा प्रणाली में द्विमार्गी डाक सम्प्रेषण माध्यम को कम से कम अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।"
अतः बाथ ने उपर्युक्त दोनों बिन्दुओं पर विशेष बल देते हुए दूर शिक्षा को सैद्धान्तिक आधार प्रदान करने में महत्वपूर्ण योगदान किया है।
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