समाजीकरण के सिद्धान्त - principles of socialization

 समाजीकरण के सिद्धान्त - principles of socialization


समाजीकरण की प्रक्रिया के संबंध में विभिन्न समाजशास्त्रियों द्वारा विभिन्न विचार व्यक्त किए गए हैं जिनमें से प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं


• दुर्खीम का सिद्धांत


• मीड का सिद्धांत


• कूले का सिद्धांत


• फ्रायड का सिद्धांत


दुर्खीम का सिद्धांत - प्रसिद्ध समाज शास्त्री इमाइल दुर्खीम ने समाजीकरण के सिद्धांत को समूहिक प्रतिनिधित्व पर आधारित बताया है।

समूहिक प्रतिनिधित्व का अभिप्राय है

व्यक्ति उन विचार धाराओं के अनुसार परिपक्व होता है जो समाज में विद्यमान होती हैं, साथ ही व्यक्ति के विकास में समाज में विद्यमान मूल्यों एवं आस्थाओं का भी प्रभाव पड़ता है।


कूले का सिद्धांत - कूले का आत्म' का सम्बोध उनके समाजीकरण सिद्धांत का आधार है। उनके अनुसार सामाजिक सामाजिक चेतना (Social Consciousness) के विकास में व्यक्ति के आत्म का बहुत महत्व है। इसके साथ ही कुले ने स्वयं का दर्पण के संबोध को प्रस्तुत किया है इस (Looking Glass Self) का प्रभाव हमारे दैनिक जीवन पर पड़ता है चूकीं इसी के द्वारा व्यक्ति के समाजीकरण की प्रक्रिया प्रारम्भ होती है व्यक्ति आत्म-चेतन सामाजिक चेतना व जन-चेतना को प्राप्त करता है


i. आत्मचेतना का अभिप्राय है व्यक्ति स्वयं के बारे में क्या सोचता है। सामाजिक चेतना का तात्पर्य है अन्य व्यक्तियों का क्या सोचना है ?

ii. जनचेतना का अभिप्राय है 'स्व'व सामाजिक चेतना का सामूहिक दृष्टिकोण जिसमें सभी व्यक्ति एक सामाजिक समूह का गठन करते हैं। 


iii. कूले का विचार है कि “जनचेतना हेतु विचारों का आदान-प्रदान जरूरी है चूंकि इसके कारण मानव संबंध बने रहते है।


मीड का सिद्धान्त - मीड के अनुसार, "जैवकीय प्राणी को सामाजिक प्राणी बनाने हेतु समाजीकरण की प्रक्रिया की आवश्यकता पड़ती है। किसी भी व्यक्ति की जैवकीय प्रवृतियां सामाजिक वातावरण में ही परिमार्जित व संशोधित होती है। मीड का यह भी मानना है कि समाजीकरण हेतु व्यक्ति के आत्म का विकास होना जरूरी है।

आत्म के विकास ही व्यक्ति अपने व अन्य लोगों के बारे में सोचता है और यह आत्म जागरूकता व सामाजिक आगरूकता समाजीकरण की प्रक्रिया का ही परिणाम है"।


फ्रायड का सिद्धान्त - फ्रायड के अनुसार, "बालक बाल्यावस्था में ही अपनी संस्कृति व समाज के बारे में ज्ञान प्राप्त करता है व वह स्वयं का अपने माँ बाप या अन्य बड़ों के साथ आत्मसात करने लगता है तथा उन्हीं के दृष्टिकोण, विचार एवं आस्थाएँ चेतन या अचेतन रूप से सिखता है। समाजीकरण हेतु फ्रायड अहम (Ego), व परम अहम (Super Ego) को आवश्यक मानता है चूंकि अहम मैं' या आत्म' के विकास में सहायक होता है व परम अहम का जैसे जैसे विकास होता है. बालक समाजीकरण की ओर उन्मुख होता जाता है।