सामाजिक शोध की समस्याएं - Problems of Social Research
सामाजिक शोध की समस्याएं - Problems of Social Research
सामाजिक शोध एक जटिल प्रक्रिया है। ऐसा प्रतीत होता है शोध सरल कार्य है, परंतु जब हम सामाजिक शोध की प्ररचना बनाना प्रारंभ करते हैं तो हमें पता चलता है कि यह कार्य कितना कठिन है। सामाजिक शोध में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहली समस्या यह है कि शोध समस्या का प्रतिपादन ठीक प्रकार से किया जा सके। ऐसा माना जाता है कि यदि शोध समस्या का निरूपण ठीक प्रकार से हो गया है तो यह आधे शोध के बराबर है। समस्या का सावधानीपूर्वक निर्माण हमें शोध के अगले चरणों में आने वाली अनेक बाधाओं से बचा सकता है। दूसरी समस्या निदर्शन के चयन से संबंधित है। सामान्यतया जिन सूचनादाताओं का चयन किया जाता है उनमें से बहुत से मिलते ही नहीं हैं।
इससे निदर्शन की विश्वसनीयता प्रभावित होती हैं। तीसरी समस्या विश्वसनीय सामग्री के एकत्रण से संबंधित है। अधिक सूचनादाता सही सूचनाएं नहीं देते हैं जिसके कारण भ्रामक निष्कर्ष निकल सकते है। एक से अधिक शोध प्रविधियों का प्रयोग करके संकलित आंकड़ों की विश्वसनीयता की जांच की जाती है। चौथी प्रमुख समस्या शोध में वस्तुनिष्ठता बनाए रखने की है। अधिकांश विद्वान इस बात पर जोर देते हैं कि सामाजिक शोध में प्राकृतिक विज्ञानों की भाँति प्रमाणिकता लाना कठिन है। समाज विज्ञानों के नियम प्राकृतिक विज्ञानों के नियमों की भांति अटल नहीं होते, वे तो सामाजिक व्यवहार के संदर्भ में संभावित प्रवृत्ति को प्रदान करते है। ऐसी स्थिति के लिए अनेक कारक उत्तरदाई है सामाजिक घटना का स्वभाव, ठोस मापदंडों का विकसित ना होना आदि। वस्तुनिष्ठ अध्ययन से संबंधित पांच प्रमुख समस्याएं हैं-
1. शोधकर्ता के बाह्य हित व्यक्तिनिष्ठता को प्रोत्साहन देते हैं।
2. समस्या का चयन सदैव मूल्य निर्णयों द्वारा प्रभावित होता है।
3. सामाजिक शोध में तटस्थता रख पाना संभव नहीं है।
4. सामाजिक घटनाओं की गुणात्मक प्रकृति शुद्ध रूप से घटनाओं के अध्ययन में एक बाधा है।
5. शोधकर्ता के नैतिक मूल्य संजाति केंद्रवाद शोध को अत्यधिक प्रभावित करते हैं। सामाजिक शोध की पांचवी और अंतिम समस्या अंतःविषयक दृष्टिकोण की है जो ज्यादातर शोधकर्ताओं में नहीं पाया जाता है। इससे सामाजिक घटनाओं की सत्यता का पूरा पता नहीं चल पाता है।
वार्तालाप में शामिल हों