नगरीय क्षेत्रों की समस्या - Problems of Urban Areas

नगरीय क्षेत्रों की समस्या - Problems of Urban Areas


बढ़ती जनसंख्या एवं नगरों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि ने भारत में कई परिवर्तनों को जन्म दिया है। इन परिवर्तनों के कारण कुछ लाभकारी परिणाम सामने आए हैं तो दूसरी और नई समस्याओं का भी जन्म हुआ है। जिसका उल्लेख करना इस इकाई ने अत्यंत आवश्यक है। नगरीय संरचना से जनित कुछ समस्याएं निम्न प्रकार है:


1. स्वास्थ्य की समस्या ( Health Problem) सामान्य धारणा यह है कि गांव के लोग नगरीय लोगों की तुलना में स्वस्थ और बलिष्ठ होते हैं। नगरीय लोग दुबले, रूग्ण और जल्द बीमार होने वाले होते हैं। नजरों में स्वच्छ वातावरण का अभाव होता है। मकानों की भीड़-भाड़, वायु प्रदूषण, मिल, फैक्ट्री का धुआं, स्थान की कमी, बंद मकान, रोशनी एवं स्वच्छ हवा का अभाव, गड़गड़ाहट एवं बहरा कर देने वाला शोरगुल, मच्छर, प्रदूषित भोजन एवं जल आदि की अधिकता, विभिन्न प्रकार के चर्म रोग. बदबूदार एवं सीलन भरे कमरे आदि सब मिलकर स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। नगरों में मृत्यु दर गांव की तुलना में अधिक होने का यह सब प्रमुख कारण है। स्वास्थ्य की सुविधा जुटाने के लिए वहां पार्क, बगीचों खेलकूद की सुविधा जुटाई जाती है। डॉ. प्रभु ने अपने मुंबई सर्वेक्षण में यह पाया कि 61% लोगों ने मुंबई में आने के बाद बीमार रहने की शिकायत की है।

30% लोगों ने परिवार जनों की मृत्यु के लिए नगर में आने के बाद लगी बीमारी को उत्तरदाई माना है। कई लोगों ने अपच एवं भूख ना लगने की शिकायत की। नगरीकरण नगरों में मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है और लोग अनिद्रा तथा अकेलेपन से परेशान रहते हैं।


2. अपराध दर में वृद्धि (Increase in Crime Rate) - गांव की तुलना में नगरों में अपराध अधिक होते हैं। परिवार, धर्म, पड़ोस, रक्त संबंध एवं सामाजिक नियंत्रण में शिथिलता के कारण अपराध बढ़ जाते हैं। नगरों में अपरचितता के कारण भी अपराध के लिए पृष्ठभूमि तैयार होती है। वहां अपराधी गिरोह अपराध में प्रशिक्षण देने का कार्य भी करते हैं। चोरी, डकैती, बैंकों को लूटना, आत्महत्या एवं हत्याएं, लड़कियों का अपहरण, बच्चों का अपहरण, धोखाधड़ी, ठगी आदि की घटनाएं होती रहती हैं जो कि नगरीय सामाजिक व्यवस्था को बहुत ही भयंकर रूप से विचलित करती हैं। समाचार पत्रों में आए दिन इस प्रकार के अपराध की घटनाएं छपते रहते हैं।


3. मनोरंजन की समस्या (Problem of Entertainment) नगरों में मनोरंजन का व्यापारीकरण पाया जाता है। सिनेमा, टेलीविज़न, खेलकूद, पार्क एवं बगीचों के लिए काफी पैसा खर्च करना होता है। यहां व्यापारिक संस्थाओं द्वारा मनोरंजन कराया जाता है जिससे कमजोर आर्थिक स्थिति वाले अपना मनोरंजन नहीं कर पाते हैं इसके विपरीत गांव में खेलकूद, नृत्य, भजनगायन आदि के माध्यम से लोगों का मनोरंजन सुगमता से होता है।


4. सामाजिक विघटन (Social Disorganization)- व्यक्तिवादिता के कारण नगरों में सामाजिक नियंत्रण शिथिल हुआ है। वहां परिवार, धर्म, ईश्वर, रक्त संबंधी, हास परिहास संबंधी नियंत्रण के अभाव में समाज विरोधी कार्य अधिक होते हैं। नगरों में नित्य नए नए परिवर्तन होने से परंपराओं एवं रीति रिवाजों से लगाव नहीं होता। नगरों में सामाजिक एवं सांस्कृतिक प्रतिस्पर्धा एवं संघर्ष देखने को मिलते हैं जो सामाजिक विघटन पैदा करते हैं। गरीबी, भिक्षावृत्ति, तलाक, बाल अपराध और अन्य अपराध नगरीय जीवन की प्रमुख समस्याएं हैं। तोड़फोड़, हड़ताल, नारेबाजी नगरीय जीवन की आम घटना है।


5. आवास की समस्या ( Residential Problem) नगरों में एक भयंकर समस्या आवासों की है। नगरों में हवा एवं रोशनीदार आवासों का अभाव होता है। नगरों में कम स्थान पर ज्यादा आवास और ज्यादा लोग निवास करते हैं जिनमें हवा एवं रोशनीदार मकानों का अभाव होता है। कई लोग सड़क के किनारे झोपड़ियां बनाकर रहते हैं कानपुर जैसे औद्योगिक नगरों में तो एक कमरे में 10 से 15 व्यक्ति रहते हैं। इन आवासों में मूत्रालय अथवा स्नानागार का भी अभाव होता है। नगरों में व्यक्ति इस तरह के स्थानों पर रहने के लिए विवश है क्योंकि निर्धनता के कारण लोग अच्छे मकान का किराया नहीं दे सकते हैं। इस प्रकार के जीवन स्तर और रहन-सहन के कारण नगरीय क्षेत्रों में व्यक्ति कई प्रकार की बीमारियों से घिरे रहते हैं।


6. भिक्षावृत्ति ( Beggary) नगरों में भिक्षावृत्ति अधिक है। सड़क के किनारे. मंदिर, मस्जिद एवं धार्मिक स्थानों के पास, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड स्थानों पर इनकी लंबी चौड़ी भीड़ देखी जा सकती हैं। भिक्षावृत्ति नगरों में व्याप्त निर्धनता का सूचक है तथा यह अपराध का भी द्योतक है। क्योंकि आजकल महानगरों मैं यहां व्यवसाय के रूप में संपोषित किया जा रहा है।


7. वेश्यावृत्ति (Prostitution) नगरों में वेश्यावृत्ति अधिक पाई जाती है। यहां यौन अपराधों की - अधिकता एवं नैतिक मूल्य में हास के कारण यह एक गंभीर समस्या के रूप में स्थापित हो चुकी है। में वेश्यावृत्ति को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में लड़कियों को जबरदस्ती विवश किया जाता है कि वह इस व्यवसाय को करें। इस प्रकार का कृत्य भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।


8. बढ़ती जनसंख्या (Excess Population) - नगरों में बढ़ती जनसंख्या ने यातायात, शिक्षा प्रशासन एवं सुरक्षा की समस्या पैदा कर दी है। सभी के लिए शिक्षा की व्यवस्था करना, यातायात एवं सुरक्षा के साधन जुटाना अत्यंत ही कठिन कार्य है।


9. नगरीय सामाजिक संरचना की विषमताओं के कारण वाले लोग विभिन्न प्रकार के मानसिक तनाव एवं संघर्ष के शिकार हो जाते हैं।