व्यावसायिक जीवन - professional life
व्यावसायिक जीवन - professional life
सन् 1871 में अपनी शिक्षा समाप्त करने के पश्चात इन्होंने अपना व्यावसायिक जीवन रेल रोड कंपनी में निदेशक के पद पर नियुक्त होकर आरंभ किया। यद्यपि कुछ समय बाद ही इस पद को छोड़कर सन् 1874 में फ्लोरेंस में एक लौह उद्योग में मैनेजिंग डायरेक्टर के रूप में कार्य करना आरंभ किया। इस पद पर कार्य करते समय पैरेटो को सभ्रांत परिवारों तथा बुर्जुआ वर्ग के उच्च परिवारों के संपर्क में रहने का प्रचुर अवसर प्राप्त हुआ। यहीं से वे जनतांत्रिक और उतारतावादी विचारों के दृढ़ समर्थक और प्रचारक बनने लगे। प्रबंधकारी निर्देशक के रूप में इन्हें इंग्लैंड तथा यूरोप के अन्य देशों में यात्रा करने का अवसर प्राप्त हुआ और साथ ही उस समय के अनेक प्रख्यात विद्वानों के संपर्क में आने का भी अवसर प्राप्त हुआ। केवल इतना ही नहीं, विभिन्न देशों में घूमने के दौरान उन देशों की प्रमुख आर्थिक समस्याओं तथा उनके स्वरूपों के प्रति भी उनकी दृष्टि आकर्षित हुई और पैरेटो उन समस्याओं के विषय में सोचने लगे।
इन सबका प्रभाव यह हुआ कि सामाजिक विज्ञान विशेषकर अर्थशास्त्र आदि का गंभीर अध्ययन किया। कुछ ही समय में इन्होंने अपने समय से पहले के अनेक प्रमुख विद्वानों जैसे- अगस्त, कॉस्ट, हरबर्ट स्पेंसर, डार्विन आदि की कृतियों को पढ़ डाला, परंतु इन सभी कार्यों के करते हुए भी ये वर्षों तक निदेशक के पद पर बने रहे।
निदेशक का यह पद पैरेटो के अत्यधिक परिवर्तनशील जीवन का प्रथम चरण मात्र था, द्वितीय चरण था अर्थशास्त्री विल्फ्रेडो पैरेटो और अंतिम चरण था समाजशास्त्री विल्फ्रेडो पैरेटो । निदेशक के पद पर कार्य करते समय ही अपनी विशेष रुचि के कारण पैरेटो अपने समाज की विभिन्न समस्याओं के संबंध में पत्रिकाओं में लेख लिखा करते थे। मजदूरों का वेतन, सरकारी अधिकार, स्वतंत्र व्यापार आदि समस्याओं से संबंधित उनके अनेक लेख भी प्रकाशित हुए। इन समस्याओं के संबंध, विशेषकर स्वतंत्र व्यापार के विषय में पैरेटो ने उदार नीति अपनाने के पक्ष में राय दिया था।
सन् 1876 में स्वतंत्र व्यापार का समर्थन करने वाला दक्षिणपंथी दल जब सत्ता से हट गया तथा उसके स्थान पर वामपंथी नीतियों का समर्थन करने वाला दल सत्तारूढ़ हो गया तब पैरेटो के विचारों का विरोध किया जाने लगा। इनके द्वारा स्वतंत्र व्यापार में उदार नीति का समर्थन इटली सरकार को अच्छा नहीं लगा और सरकार ने भविष्य में ऐसे लेख न लिखने के लिए उन्हें चेतावनी भी दी। इन्हीं कारणों से उन्हें लेखनी का कार्य स्थगित करना पड़ा पर वो इससे संतुष्ट नहीं थे। ऐसा माना जाता है कि शायद यहीं कारण रहा होगा. जिसकी वजह से पैरेटो अपने पिता की भाँति आदर्शवादी और प्रजातांत्रिक न्याय के पक्ष पोषक न बन सके। फिलहाल सन् 1882 में तत्कालीन सरकारी नीतियों का विरोध करने के लिए तथा • ऐसी अवस्था को समाप्त करने के लिए पैरेटो सक्रिय राजनीति में उतरने का फैसला लिए जिसकी वजह से सन् 1882 में ही सरकार के एक विरोधी प्रत्याशी के रूप में फ्लोरेन्स चुनाव क्षेत्र में चुनाव लड़े. परंतु वे चुनाव में असफल रहे। दुर्भाग्यवश इसी वर्ष इनके पिता का देहांत हो गया। पिता के देहांत का इनके मन मस्तिष्क पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा। इस समय तक भी ये फ्लोरेंस के लौह-उद्योग में कार्यरत रहें।
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