मनोबंधात्मक प्रक्रमण - Psychological processing

मनोबंधात्मक प्रक्रमण - Psychological processing


परिवेश में घटित होने वाली समस्त प्रकार की घटनाओं के सभी विवरणों पर ध्यान देना और प्रत्यक्षीकृत कर लेना मानव मस्तिष्क के लिए असंभव है। मनोवैज्ञानिकों ने निर्विवाद रीति से प्रदर्शित किया है कि मनुष्य सीमित सारणी क्षमता का होता है और किसी भी समय एक साथ दो सूचना इकाइयों से अधिक को अपनी चेतना में धारण नहीं कर सकता। इसका तात्पर्य है कि कोई भी व्यक्ति निश्चित समय में कुछ ही निर्णय कर पाता है। व्यक्ति को लड़ाई करना पड़ता है कि सामाजिक सूचना निवेश के सही प्रक्रमण के लिए उपयुक्तमनोबन्ध का चयन कर ले या उसका निर्माण कर भविष्य में उपयोग के लिए भंडारित कर ले। उपर्युक्त मनोबन्ध के प्राप्त हो जाने पर चालू सूचना निवेश का कूट संकेतन एवं प्रक्रमण स्वतःचालित रीति से हो जाता है। इस प्रकार सूचना प्रक्रमण करने से नये सामाजिक निर्णय अनुमान करने की आवश्यकता बहुत कम हो जाती है। 


मनोबंधात्मक प्रक्रमण में व्यक्ति को मात्र यह निर्णय विशेष रूप से करना पड़ता है कि कौन सा मनोबन्ध सक्रिय है। जब प्रथम दृष्टया सही मनोबन्ध मिल जाता है

तो स्वतःचालित रीति से सूचनाओं का प्रक्रमण हो जाता है। परिणामस्वरूप व्यक्ति को आवश्यक सामाजिक संज्ञान हो जाता है। इसके कारण व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले सामाजिक संज्ञान हो जाता है। इसके कारण व्यक्ति द्वारा किये जाने वाले सामाजिक निर्णयों की संख्या बहुत कम हो जाती है। जैसे-जैसे व्यक्ति का सामाजिक अनुभव बढ़ता है, वैसे-वैसे उसे अनुभव होने लगता है कि सामाजिक अनुमान के लिए सामाजिक परिवेश के बहुत विवरण महत्वपूर्ण नहीं होते। इसके कारण सामाजिक संज्ञान प्रप्त करने का प्रक्रम बहुत सरल हो जाता है।


मनोबंधात्मक प्रक्रमण से सामाजिक संज्ञान के साथ-साथ उपयुक्त भावोत्प्रेरण भी स्वतः हो जाता है। सामाजिक परिवेश से सूचना संकेतों के मिलने पर व्यक्ति सजग हो जाता है। तथा उसका चायनात्मक अवधान सक्रीय हो जाता है। चयनित सूचना संकेतों के मनोबंधात्मक प्रकमण के परिणाम स्वरूप भावोत्प्रेरण की तीव्रता निर्धारित होती है और सामाजिक संज्ञान का स्वरूप निर्धारित होती है। इसी संज्ञान से भावोत्प्रेरण का अनुकर्षण संज्ञान की प्रासांगिता तथा संगति निर्धारित होती है। अनुकर्षण धनात्मक या ऋणात्मक हो सकता है, इन्हीं के आधार पर संज्ञान का पूर्ण विवरण प्रस्तुत किया जाता है और भावात्मक निर्यान, मूल्याकन, प्रत्यक्ष प्रभाव या प्रियता-अप्रियता निर्धारित होती है।