क्यू- प्रणाली का स्वरूप - Q-System Nature

 क्यू- प्रणाली का स्वरूप - Q-System Nature


क्यू-प्रणाली की व्याख्या पहले विलियम स्टीफेनसन ने 1953 में मनोवृति, पसंदो, आदि के बारे में को दिए गए कथनों या अन्य कथनों का विश्लेषण करते हुए अध्ययन करने के लिए किया था। क्यू प्रणाली की कार्यविधि को क्यू- प्रविधि कहा जाता है। इस प्रविधि में व्यक्ति दिए गए कथनों या अन्य उद्दीपकों को विभिन्न भागों में छांटता है। इन भागों को क्यू शार्ट कहा जाता है।


क्यू प्रविधि में प्रयोज्य दिए गए वस्तुओं, जैसे तस्वीरों, कथनों शब्दों आदि को एक कोटि क्रम के रूप में दिए गए श्रेणियों में किसी निश्चित कसौटी के आधार पर छांटता है।

प्रत्येक छाटें जाने वाले वस्तु जैसे कथन, शब्द या तस्वीर एक अलग कार्ड पर होता है और उन्हें प्रयोज्य या प्रयोज्यो का समूह दिए गए श्रेणियों में जिसकी संख्या सामान्यतः 9 या 11 होती है. में छांटता है। करलिंगर 1986 ने अपना मत व्यक्त करते हुए कहा है कि क्यू- प्रविधि का विश्वसनीय होने के लिए उसने सांख्यिकी स्थिरता पर्याप्त मात्रा में होने के लिए यह आवश्यक है कि छाटे जाने वाले वस्तुओं की संख्या 60 से कम नहीं तथा 140 से अधिक नहीं होनी चाहिए। प्रयोज्य को यह निर्देश दे दिया जाता है कि दिए गए श्रेणियों में से प्रत्येक श्रेणी में वह एक निश्चित संख्या में वस्तुओं को छांटें। इससे फायदा यह होता है कि छांटने से प्राप्त वितरण सामान्य होगा या निश्चित रूप से अर्द्ध सामान्य होगा जिससे सांख्यिकीय विश्लेषण मैं काफी सुविधा होती है। परंतु यह कोई निश्चित नियम नहीं है। क्यू- प्रविधि में कभी-कभी प्रयोज्यों से यह भी आग्रह किया जाता है कि वे प्रत्येक श्रेणियों में छाटें गए वस्तुओं की संख्या बराबर बराबर रखें। इस तरह के सार्टिंग से मिलने वाले वितरण को आयताकार वितरण कहा जाता है।


क्यू- सार्ट के प्रकार


शोध मनोवैज्ञानिकों ने क्यू- सार्ट को निम्नांकित दो भागों में बांटा है


1- असंरचित क्यू- सार्ट


2- संरचित क्यू- सार्ट


1- असंरचित क्यू- सार्ट- क्यू प्रणाली के क्षेत्र में जितने अध्ययन हुए हैं उनमें असंरचित क्यू- सार्ट पर आधारित अध्ययन अधिक देखे गए हैं। नन्नली (1970) के अनुसार असंरचित क्यू- सार्ट एकांश या सामग्रियां यादृच्छिक प्रतिदर्शन पर आधारित होते हैं।

इसमें शोधकर्ता विभिन्न स्रोतों से प्रतिनिधि सामग्रियों का चयन करता है, या वह मानसिक बीमारियों के बारे में तरह तरह के कथनों को संग्रह कर सकता है आदि आदि। परंतु यह सभी सामग्रियां कोई नियम या सिद्धांत पर आधारित नहीं होता है और उन्हें सार्टिंग के लिए ऐसे ही यादृच्छिक ढंग से चयन कर लिया जाता है। करलिगर (1986) के शब्दों में इस प्रकार इसे परिभाषित किया जा सकता है," असंरचित क्यू- सार्ट संग्रह किए गए वैसे एकाशों का सेट है जो कोई कारको या च पर आधारित नहीं होता है।"


सैद्धांतिक रूप से असंरचित क्यू- सार्ट मे समजातीय एकांशो की संख्या कुछ भी हो सकती है। शोधकर्ता जितने एकांशो को चाहे उसमे सम्मिलित कर सकता है.

सच पूछा जाए तो असंरचित क्यू- सॉर्ट के एकांशों का स्वरूप मनोवृति या व्यक्तित्व मापनी के एकांश के ही समान होता है क्योंकि जैसे मनोवृति या व्यक्तित्व मापनी में सभी एकांश किसी एक बीमा बहिर्मुखता, नेतृत्व, राजनीति के प्रति मनोवृति आदि से संबंधित होते हैं, ठीक उसी तरह से क्यू- सार्ट के सभी एकांश किसी एक क्षेत्र के होते हैं। सार्टिंग कर से लेने के बाद प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सह संबंध ज्ञात किया देखने की कोशिश की जाती है कि विभिन्न तरह के सार्टर सामग्रियों या एकाशों के प्रति किस ढंग का अपना मत या विचार रखते हैं।


2- संरचित क्यू-सार्ट - असंरचित क्यू- सार्ट की तरह संरचित क्यू- सार्ट में सभी एकांश एक ही क्षेत्र के होते हैं। परन्तु वे सभी एकांश किसी एक खास प्राकल्पना या चर से संबंधित होते हैं

और विश्लेषण के दौरान उन्हें एक या एक से अधिक विधियों या कसौटीयो के आधार पर दो या दो से अधिक भागों में बांटा जाना संभव होता है। संरचित क्यू- सार्ट में प्रयोगात्मक डिजाइन के रूप में एकाशों को लिखा जाता है। यदि डिजाइन ऐसा होता है जिसमें एकाशों को एक चर वर्गीकरण के आधार पर दो भागों में बांटा जाता है तो इसे एक-तरफा संरचित क्यू- सार्ट कहा जाता है। परंतु यदि डिजाइन ऐसा होता है जिसमें एकाशों को दो चर वर्गीकरण के आधार पर दो अधिक भागों में बांटा जाता है तो इसे दो तरफा संरचित क्यू-सार्ट कहा जाता है। एक तरफा संरचित क्यू सार्ट का उदाहरण इस प्रकार है- मान लिया जाए कि कोई शोधकर्ता राष्ट्रीयकरण के प्रति मनोवृति का अध्ययन क्यू शार्ट के माध्यम से करना चाहता है। इसमें दो तरह के लोगों को सार्टर के रूप में चयन किया जाएगा निजी क्षेत्र से सार्वजनिक क्षेत्र से अगर लोग यह समझते हैं कि राष्ट्रीयकरण से प्रगति होती है तथा आर्थिक समृद्धि आती है तो ऐसी परिस्थिति में निजी क्षेत्र तथा सार्वजनिक क्षेत्र दोनों ही क्षेत्र के लोग अनुकूल एकाशों को ऊंची कोटि तथा प्रतिकूल एकाशों को नीची कोटी देंगे।

फिर इन दोनों तरह की कोटियों के बीच एक तरफा प्रसरण विश्लेषण का प्रयोग कर शोधकर्ता किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचता है।


दो तरफा संरचित क्यू सार्ट का एक उदाहरण इस प्रकार है- मान लिया जाए कि कोई शोधकर्ता दहेज के प्रति मनोवृति तथा आय का स्तर का अध्ययन करना चाहता है। वह मनोवृत्ति को दो भागों में बांट सकता है- उदार तथा रूढ़ीवादी तथा आय के स्तर को भी दो भागों में बांट सकता है- उच्च आय वाला व्यक्ति तथा निम्न आय वाला व्यक्ति। इस तरह 2x2 प्रयोगात्मक डिजाइन तैयार हो जाएगा और क्यू सार्ट का प्रत्येक एकांश 2x2 तालिका के 4 सेल में से किसी एक सेल में अवश्य ही पड़ेंगे। कोई भी मनोवृति एकांश या तो उदार श्रेणी का होगा या रूढ़ीवादी श्रेणी का परंतु साथ ही साथ वह उच्च आय वाले व्यक्ति से संबंधित होगा या निम्न आय वाले व्यक्ति से संबंधित होगा। प्राप्त आंकड़े के आधार पर 2x2 कारक ANOVA ज्ञात करके शोधकर्ता निश्चित निष्कर्ष पर पहुंच पाता है।