रेडिकल स्त्रीवादी अंतर्दृष्टियां - Radical Feminist Insights

रेडिकल स्त्रीवादी अंतर्दृष्टियां - Radical Feminist Insights


1960 के दशक में स्त्रीवाद के इस नए उभार में सिमोन, केट मिलेट एवं फायरस्टोन जैसी कुछ विदूषी स्त्री लेखिकाओं का बड़ा योगदान रहा है। साथ ही न्यू लेफ्ट आंदोलनों से जुड़ी युवा पीढ़ी की स्त्रियों के कटु अनुभवों ने भी एक नई जमीन तैयार करने का कार्य किया। छोटे-छोटे स्त्री समूहों ने आपसी अनुभवों को साझा करने के दौरान पाया कि उनके निजी जीवन से जुड़ी समस्याएँ लगभग समान ही है। रेडिकल स्त्रीवादी विचारकों का मानना है कि स्त्रियों के शोषण का मूल कारण पूँजीवाद नहीं, बल्कि पितृसत्ता और उसका वर्चस्व है। सिमोन जेंडर संरचना को बदले जाने की बात करती हैं, और कहती हैं कि इससे लिंगों के बीच समानता का संबंध बनेगा। वे अपनी पुस्तक द सेकेंड सेक्स में कहती हैं कि कोई स्त्री के तौर पर जन्म नहीं लेता बल्कि उसे बनाया जाता है। छोटी-छोटी लड़कियों की परवरिश अथवा समाजीकरण भी इसी तरह किया जाता है कि आमतौर पर वे रूमानी प्रेम और अन्य तथाकथित स्त्रियोचित जेंडर भूमिकाओं को आसानी से स्वीकार लें।

पितृसत्तात्मक व्यवस्था स्त्रियों को उनके लिंग के आधार पर इस तरह परिभाषित करती है कि उनका विशिष्ट काम महज पुरुषों की काम वासना की पूर्ति करना, गर्भधारण एवं संतान को जनना और उसका पालन पोषण करना भर है। लेकिन रेडिकल स्त्रीवाद का मानना है कि पितृसत्ता के अंतर्गत स्त्रियाँ जबरन मातृत्व और यौन गुलामी के लिए अभिशप्त होती हैं। स्त्रीवाद की यह मुखर विचारधारा तो यहाँ तक कहती है कि मातृत्व कुल मिलाकर पितृसत्ता के तहत कराया गया बलात श्रम ही है।


रेडिकल स्त्रीवाद पुरुषवादी सामाजिक उत्पीड़नकारिता के विविध रूपों को रेखांकित करते हुए पितृसत्ता संस्था द्वारा स्त्रियों पर की जा रही वर्जनाओं को चुनौती देता है। मातृत्व के आंशिक अपवाद को छोड़ दिया जाए तो पितृसत्तात्मक संस्कृति के संदर्भ में खियों को महज यौन अर्थों में ही परिभाषित किया जाता रहा है। जेंडर एवं यौनिकता केवल हमारे निजी जीवन के ही नहीं, बल्कि हमारे पूरे सामाजिक तथा सार्वजनिक जीवन का सरोकार बनते हैं। रेडिकल स्त्रीवाद का सबसे महत्वपूर्ण नारा व्यक्तिगत ही राजनीतिक है' इस वाक्य को सही अर्थों में परिभाषित करता है। यह नारा घर के अंदर और बाहर की संरचनाओं में व्याप्त जेंडरगत प्रताड़नाओं की बखूबी पड़ताल करता है।