संबंधात्मक-नियामक संस्थाएँ - relational regulatory bodies
संबंधात्मक-नियामक संस्थाएँ - relational regulatory bodies
ये एक प्रकार से संगठित करने वाली संरचनाएँ होती हैं जैसे सामाजिक संबंधों का संगठन और नियामक आदर्श नियम आदि।
सामाजिक व्यवस्था को विभिन्न संस्थाओं में विभाजित करने की प्रक्रिया को पारसन्स ने संस्थाकरण कहा है। संस्थाकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पारसन्स ने लिखा है - "संस्थाकरण का एक प्राथमिक कार्य इन विभिन्न क्रियाओं और संबंधों को व्यवस्थित करने में सहायता करना है ताकि वे पर्याप्त रूप से ऐसी समन्वित व्यवस्था का निर्माण कर सकें जिसे कर्ता प्रबंध कर सके और जिससे कि सामाजिक स्तर पर संघर्ष को कम किया जा सके।"
संस्थाएँ सामाजिक व्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। वे मार्गदर्शक का कार्य करती हैं। संस्थाएँ समय सूची का भी निर्माण करती हैं कि किसी समय क्या काम करना चाहिए? इसके परिणामस्वरूप हर कार्य अपने समय पर होता है और किसी प्रकार की दुविधा या संघर्ष नहीं उत्पन्न होती है।
इसी प्रकार, संस्थागत प्राथमिकताएँ भी संस्थाएँ निर्धारित करते हैं संस्थागत प्राथमिकता का यह अभिप्राय है कि किस क्रिया को प्राथमिकता देनी चाहिए? संस्थाएँ यह बताती हैं कि विभिन्न क्रियाओं का क्या क्रम है। संस्थागत प्राथमिकताएँ मुनष्यों को कर्तव्यों के संघर्ष से बचाती हैं। मान लीजिए एक डाक्टर है। उसकी डाक्टर होने के नाते व्यावसायिक आचार का उसे पालन करना पड़ता है। मान लीजिए एक समय वह घर के उत्सव में भाग ले रहा हैं और उसी समय किसी सख्त बीमार को देखने के लिए उसे बुलावा आता है। इस संघर्ष की स्थिति में वह क्या करे, इसका निर्णय संस्थागत प्राथमिकताएँ करती हैं और व्यक्ति को दुविधा में पड़ने से बचाती हैं।
पारसन्स ने सामाजिक व्यवस्था का विश्लेषण सामाजिक क्रिया के संदर्भ में किया है। उसके अनुसार सामाजिक व्यवस्था क्रिया व्यवस्था का ही एक भाग है। पारसन्स ने उसी दृष्टि से इसकी व्याख्या की है।
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