समाजमिति विधि की विश्वसनीयता एवं वैधता - Reliability and Validity of Sociometric Method
समाजमिति विधि की विश्वसनीयता एवं वैधता - Reliability and Validity of Sociometric Method
यह अनिवार्य रूप से माना जाता है कि किसी भी तकनीक से प्राप्त प्रदत्त तब तक वस्तुनिष्ठ और वैज्ञानिक नहीं होते हैं जब तक उनमें विश्वसनीयता और वैधता के गुण न हो। समाजमितिक प्रदत्तों की विश्वसनीयता और वैधता ज्ञात करना अत्यंत कठिन है क्योंकि समाजमितिक प्रदत्तों की वास्तविक प्रकृति विश्वसनीयता वैधता के गुणों के लिए अनुपयुक्त है। सामान्य विश्वसनीयता ज्ञात करने के लिए चार विधियों- निर्णयाको के बीच संगति, समयाअंतराल पर लब्धाकों में संगति, समान परीक्षणों के परिणामों में संगति और आंतरिक संगति का उपयोग किया जाता है। वैधता का निर्धारण करने के लिए विषय वस्तु वैधता मानदंडोंन्मुख वैधता और निर्मिति की विधियों का प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है।
समाजमितिक प्रदत्तों की विश्वसनीयता एवं वैधता का मूल्यांकन करने के लिए इन विधियों की उपयोगिता का निर्धारण करने से पूर्व यह ध्यान में रखना आवश्यक है कि समाजमिति तकनीक प्राप्त प्रदत्त वाचिक स्तर पर व्यक्ति की कामनाओं को प्रकट करते हैं और व्यक्ति की कामनाएं और उसके वाचिक व्यवहार, विशेषत: समूह के अन्तर्क्रिया स्तर पर, अनेक कार्य को से प्रभावित होते हैं, और पर्याप्त शीघ्रता के साथ बदलते भी हैं। इसके फलस्वरूप समाजमितिक प्रदत्तों की विश्वसनीयता का निर्धारण कठिन हो जाता है। वाचिक व्यवहार होने के कारण वैधता का भी निर्धारण जटिल समस्या हो जाती है. तथापि अनेक लोगों ने समाजमितिक प्रदत्तों की विश्वसनीयता और वैधता निर्धारित करने के उद्देश्य से कई विधियों का उपयोग किया गया है।
विश्वसनीयता - अभी तक ने या उपकरण की विश्वसनीयता के निर्धारण में मनोवैज्ञानिक प्राय: चार विधियों का उपयोग करते हैं-
1- निर्णायकों के बीच संगति
2- विभिन्न समयो पर किए गए मापनों में संगति
3- प्रारूप वाले दो उपकरणों से प्राप्त लब्धाकों में संगति, तथा
4- उपकरण की आंतरिक संगति। इन्हीं विधियों का उपयोग कर समाजमितिक तकनीक की विश्वसनीयता का निर्धारण किया गया है।
दो निर्णायकों के बीच संगति का तात्पर्य सरल है। यदि समाजमितिक की एक ही तकनीक से प्राप्त प्रदत्त दो निर्णायकों को दिए जाए और यह कहा जाए कि उससे सामाजिक लेखा चित्र निर्मित करें तो दोनों निर्णायकों द्वारा बनाए गए चित्र एक दूसरे से भिन्न ने दिखाई पड़ेंगे। कारण यह है कि इस प्रकार के लेखा चित्र निर्माण की कोई प्रमाणिक नियमावली नहीं है, तथापि बाह्य रूप से भिन्न लगने पर भी दोनों लेखाचित्रों से समूह की रागात्मक संरचना एक ही प्रकार की होती है। दोनों चित्र में सितारा, बहिष्कृत, पृथक्कृत, समूह में गुटबंदी, परस्पर आकर्षण विकर्षण आदि गुणात्मक विशेषताएं एक ही रूप में प्रकट होती हैं। इस प्रकार गुणात्मक दृष्टि से समाजमितिक प्रदत्तों को विश्वसनीय माना जाता है। विभिन्न प्रकार के अंकगणितीय सूचकांकों की गणना चाहे जो भी करें, वे सर्वदा समान मूल्य के होंगे क्योंकि उनकी गणना में किसी प्रकार के आत्मनिष्ठ निर्णय की आवश्यकता नहीं पड़ती।
विभिन्न समयों पर प्राप्त सामाजिक मामलों में संगति का तात्पर्य है कि एक ही समूह में सामाजिक बरणों और अस्वीकृतियों का कुछ अंतराल के बाद मापन करने पर एक समान माप उपलब्ध हो। समाजमितिक में विश्वसनीयता मापन की इस विधि का उपयोग सैद्धांतिक दृष्टिकोण में तर्कसंगत नहीं लगता। अंतर्वैयक्तिक संबंध एक गतिकीय प्रक्रम है। समय के साथ अनुभवों में वृद्धि के कारण तथा अनेक परिवेशीय चरों के हस्तक्षेप से अंतर्वैयक्तिक संबंध बदलते रहते हैं। समाजमितिक वरणों और अस्वीकृतियों के लिए समय के साथ अपरिवर्तय रहने का अभिग्रह तर्कसंगत नहीं, तथापि अनेक समाज मित्रों ने मापन पुनर्मापन विधि का उपयोग कर समाजमितिक मापों की विश्वसनीयता के स्तर एवं उनको प्रभावित करने वाले चरों को स्पष्ट करने का प्रयत्न किया है। इन अध्ययनों से समय के साथ समाजमितिक मापों की संगति के संबंध में मूल्यवान जानकारी प्राप्त हुई है। परीक्षण पुनर्परीक्षण के बीच सहसंबंध उच्च स्तरीय रीति से धनात्मक होता है किंतु इन दोनों के बीच दरार जितना लंबा होता है, सहसंबंध की मात्रा भी उतनी ही न्यून होती है। दूसरी ओर यह पाया गया है कि इस प्रकार के परीक्षण से प्राप्त लगभग प्रयोज्यों की आयु के साथ बढ़ जाते हैं। तात्पर्य यह है कि अधिक आयु के लोगों में पारस्परिक संबंध अल्प वयस्कों की तुलना में अधिक स्थाई होता है। ऐसा क्यों होता है, यह एक रुचिकर विवाद का विषय है। इस स्थायित्व को अंतर्वैयक्तिक संबंधों के स्थायित्व के कारण कहा जा सकता है और स्मृति क्षमता में वृद्धि के कारण यह भी पाया गया है कि समय के साथ प्रथम वरीयता में अधिक, दूसरी वरीयता में उससे कम और तीसरी वरीयता में उससे भी कम स्थायित्व दिखता है। उन समूहों के समाजमितिक माप समय के साथ अधिक स्थिर होते हैं जो अधिक दिनों से अस्तित्व में है और सक्रिय भी हैं। अंतिम बात यह है कि समय के साथ मापों की संगति में विस्तृत अंतर्वैयक्तिक भिन्नता पाई जाती है।
वैधता यदि समाजमितिक माप की मात्रा वाचिक वरण व्यवहार (Preference behaviour) मान लिया जाए तो वैधता का प्रश्न उपस्थित नहीं होता। विभिन्न प्रायोगिक अध्ययनों में जिस प्रकार अध्ययन किए जाने वाले व्यवहारों के माप की वैधता का प्रश्न नहीं उठाया जाता, उसी प्रकार समाजमिति वाचिक वरण व्यवहार का मापन है और इसलिए स्वयं वैध है। वैधता का प्रश्न तभी उपस्थित होता है जब समाजमितिक को एक परीक्षण के रूप में देखा जाए। मनोवैज्ञानिक परीक्षण में और समाजमिति में अनेक महत्वपूर्ण अंतर है। वैधता का प्रश्न समाजमितिक माप के संबंध में उसी सीमा तक प्रासंगिक है, जिस सीमा तक अन्य मनोवैज्ञानिक चरों के साथ इसके प्रकार्यात्मक संबंध को प्रदर्शित किया जा सकता है। इस दृष्टिकोण से समाजमितिक मापों और अनेक प्रकार के नैमित्क व्यवहारों के बीच सहसंबंध पाए गए हैं। समाजमितिक माप के आधार पर लोगों के व्यक्तित्व की विशेषताओं, उनके अभियोजन स्तर उनकी नेतृत्व कुशलता आदि का पूर्व कथन किया जा सकता है। इस दृष्टिकोण से समाजमितिक एक वैध तकनीक है।
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