धर्म, धर्मनिरपेक्षता एवं शिक्षा - Religion, Secularism and Education

 धर्म, धर्मनिरपेक्षता एवं शिक्षा - Religion, Secularism and Education


जो प्राणि-मात्र को स्थायित्व एवं शक्ति प्रदान करता है उसे धर्म कहते है। स्वामी विवेकानंद के अनुसार व्यक्ति में अंतर्निहित आध्यत्मिक तथा दैवी शक्ति ही धर्म है। भारतीय दर्शन में धर्य, क्षमा, दम, अस्तेय, पवित्रता, इन्द्रिय निग्रह, ज्ञान, विवेक, सत्य और अक्रोध यह धर्म के दस लक्षण बताये है। धर्म एवं शिक्षा में घनिष्ठ संबंध होने के कारण धर्म को शिक्षा से अलग नहीं कर सकते। विद्यालयों की दिनचर्या में सर्वधर्म प्रार्थना. मौन चिंतन, सामाजिक एवं धार्मिक सलोखा निर्माण करनेवाली गतिविधियाँ धार्मिक एवं नैतिक विचारकों का विचारमंथन, महान पुरुषों की जीवनगाथा, आदर्श एवं प्रेरनादायी पुस्तक एवं वचनों का पठन आदि सम्मिलित होने चाहिए।


नैतिक मूल्यों का विकास करना, मानवतावादी दृष्टिकोण का विकास करना, सामाजिक आदर्शों का विकास करना, सामाजिक मूल्यों का विकास करना, संविधानिक मूल्यों का परिपोष करना, चारित्रिक गुणों का विकास करना, मानवाधिकार के प्रति जागरूकता निर्माण करना, विश्वकल्यान, लोककल्यान की भावना का विकास करना, वैश्विक शांति की भावना का विकास करना, आदर्श जीविकोपार्जन के लिए कौशल एवं प्रशिक्षण प्रदान करना, लोकतांत्रिक मूल्यों का विकास करना, सर्वधर्म समभाव की भावना का विकास करना आदि उद्देश्यों पर आधारित शिक्षा होनी चाहिए।